आगरा। हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी जाने वाले मार्ग के निर्माण कार्य में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कराई गई जांच में कई अधिकारी और कार्यदायी फर्में दोषी पाई गई हैं।
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता, वर्क सुपरवाइजर तथा संबंधित फर्मों की लापरवाही और अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच के आधार पर दोनों फर्मों पर आर्थिक दंड लगाया गया है, जबकि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संस्तुति प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजी गई है।
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब विभिन्न समाचार पत्रों में सड़क निर्माण में गड़बड़ी की खबरें प्रकाशित हुईं। इसके बाद महापौर ने नगर आयुक्त को थर्ड पार्टी जांच कराने के निर्देश दिए। जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा सहयोग न किए जाने पर महापौर ने पार्षदों की टीम गठित कर स्वतंत्र निरीक्षण कराया। पार्षदों की टीम ने भी निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई और थर्ड पार्टी जांच की सिफारिश की।
इसके उपरांत महापौर ने मुख्यमंत्री को पूरे मामले की लिखित शिकायत भेजी, जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव द्वारा नगर निगम आगरा से रिपोर्ट तलब की गई।
जांच प्रक्रिया के तहत प्रभारी मुख्य अभियंता, नगर निगम आगरा तथा स्वतंत्र तृतीय पक्ष संस्था “बीएलजी कंस्ट्रक्शन सर्विसेज प्रा. लि.” से तकनीकी परीक्षण, अभिलेखीय जांच और स्थलीय निरीक्षण कराया गया। जांच में सामने आया कि हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी तक का मार्ग पहले से अत्यंत जर्जर था, जिसे सुधारने के लिए 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत दो परियोजनाएं स्वीकृत की गई थींकृसड़क चैड़ीकरण एवं ब्लैक टॉपिंग (53.92 लाख रुपये) तथा साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स (79.37 लाख रुपये)।
हालांकि, जांच में गुणवत्ता और कार्य निष्पादन में गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके चलते अब संबंधित अधिकारियों और फर्मों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई को नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा।
