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मैक्स अस्पताल, वैशाली में बेटे ने लीवर दान कर पिता को दिया नया जीवन

मुरादाबाद (विधान केसरी)। साहस, प्रेम और आधुनिक चिकित्सा का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली के डॉक्टरों ने एंड-स्टेज लिवर डिज़ीज से पीड़ित 51 वर्षीय व्यक्ति का जटिल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कर सफलतापूर्वक जीवन बचाया।
मुरादाबाद में प्रेसवार्ता करते डॉ राजेश डे 

लिवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से अस्पताल द्वारा एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान इलाज करने वाले डॉक्टरों ने इस केस के साथ-साथ समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सत्र में डॉ. राजेश डे, निदेशक – लिवर ट्रांसप्लांट एवं बिलियरी साइंसेज, रोबोटिक सर्जरी, पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट, तथा डॉ. तेजल भोय, कंसल्टेंट – लिवर ट्रांसप्लांट एवं बिलियरी साइंसेज, मैक्स अस्पताल, वैशाली उपस्थित रहे। मुरादाबाद निवासी श्री राजेश्वर कुमार पिछले तीन वर्षों से क्रॉनिक लिवर डिज़ीज से जूझ रहे थे। इसके साथ ही उन्हें लंबे समय से डायबिटीज और हाइपोथायरायडिज्म की समस्या भी थी, जो जीवनशैली से जुड़े कारणों के चलते और जटिल हो गई थी। स्थिति गंभीर होने पर लिवर ट्रांसप्लांट ही उनके लिए एकमात्र जीवनरक्षक विकल्प बचा। यह ट्रांसप्लांट प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता, ग्रुप चेयरमैन – सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, मैक्स हेल्थकेयर के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान उनके 26 वर्षीय बेटे, हिमांशु कुमार, जो पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, ने साहस और संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।
डॉ. राजेश डे ने इस केस पर बात करते हुए कहा, “यह मामला लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी में हुई प्रगति और समय पर इलाज की अहमियत को दर्शाता है। इस प्रक्रिया में मरीज के बेटे द्वारा लगभग 680 ग्राम वजन का लिवर का हिस्सा (राइट लोब) दान किया गया, जिसे सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। डोनर और रिसीपिएंट दोनों की रिकवरी अच्छी रही, डिस्चार्ज के समय उनकी स्थिति स्थिर थी, ग्राफ्ट फंक्शन अच्छा था और लिवर फंक्शन टेस्ट सामान्य थे। लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सटीक योजना, उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल और टीमवर्क की आवश्यकता होती है। इस सफलता में सर्जिकल विशेषज्ञता, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल और परिवार के अटूट सहयोग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. तेजल भोय ने आगे कहा, “इस केस की विशेषता यह है कि सर्जरी के बाद मरीज के जीवन में समग्र सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। जहां ट्रांसप्लांट ने तत्काल चिकित्सा चुनौती का समाधान किया, वहीं दीर्घकालिक सफलता काफी हद तक जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टरों की सलाह का पालन करने पर निर्भर करती है। मरीज ने स्वस्थ आदतें अपनाने के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है, जो भविष्य की जटिलताओं को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। यह उदाहरण बताता है कि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप, जागरूकता और व्यवहार में बदलाव से बेहतर और स्थायी स्वास्थ्य परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
यह मामला न केवल मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली की क्लिनिकल उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि भारत में बढ़ते लिवर रोगों के बोझ से निपटने के लिए अंगदान और निवारक स्वास्थ्य जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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