बलिया। जनपद में जाति प्रमाण पत्रों को लेकर प्रशासन ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति स्पष्ट कर दी है। जिला कास्ट स्क्रूटनी कमेटी की बैठक में यह साफ संदेश दिया गया कि केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस और प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर ही गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी होंगे। संदिग्ध मामलों पर न सिर्फ प्रमाण पत्र रोके जाएंगे, बल्कि तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज की जा सकती है। यह सख्ती न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की कोशिश है, बल्कि वास्तविक पात्रों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी एक जरूरी कदम मानी जा रही है।
जिला कास्ट स्क्रूटनी कमेटी की बैठक बुधवार को विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में गोंड जाति के जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने से जुड़े विभिन्न मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई और प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सख्त बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक के दौरान शिकायतकर्ताओं की ओर से उपस्थित वकीलों ने अपने- अपने पक्ष में साक्ष्य एवं दस्तावेज जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए। इस क्रम में शिकायतकर्ता दयाशंकर ने बताया कि वह झारखंड से आए हैं और उनका गोंड जाति प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बन पाया है। इस पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि झारखंड में उनके दादा-दादी एवं अन्य पारिवारिक सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं। पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न होने की स्थिति में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकेगा।
बैठक में एक अन्य मामला दीपक खरवार के नाम से जारी जाति प्रमाण पत्र को लेकर सामने आया। वकीलों ने दावा किया कि प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार संबंधित व्यक्ति दीपक कुमार कमकर जाति से संबंधित है। इस पर जिलाधिकारी ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए और संबंधित दस्तावेजों की पुनः समीक्षा कराने को कहा।
इसके अलावा परमात्मानंद से जुड़े मामले में जानकारी छिपाने की बात सामने आने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी देता है या तथ्य छिपाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एफआईआर दर्ज करना भी शामिल है।
जिलाधिकारी ने बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में तहसीलदार सदर, संबंधित वकील एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
