बलिया। जनपद में पर्यटन विकास को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 908 लाख रुपये की आठ महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति देकर बड़ी सौगात दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इन परियोजनाओं के तहत जिले के विभिन्न विधानसभाओं में स्थित प्रमुख धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास कराया जाएगा। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए यूपीएसटीडीसी को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है, जिसे गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय को बलिया के पर्यटन परिदृश्य को बदलने वाली पहल माना जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि रसड़ा के लखनेश्वर जी मंदिर, बांसडीह के काली मंदिर, सिकंदरपुर के शिव मंदिर, बेल्थरा क्षेत्र के राम जानकी मंदिर, बलिया नगर स्थित महर्षि भृगु आश्रम, फेफना के बाबा मुक्तिनाथ धाम, बैरिया के खपड़िया बाबा आश्रम और नगरा के पुरातन शिव मंदिर के विकास के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं के तहत सौंदर्यीकरण, मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार, यात्री सुविधाएं, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, विश्राम स्थल, संपर्क मार्ग और पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे इन स्थलों की पहचान और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे। विशेष रूप से महर्षि भृगु आश्रम के लिए सर्वाधिक 437 लाख रुपये की स्वीकृति इस बात का संकेत है कि सरकार इस स्थल को प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।
सरकार की इस पहल को बलिया के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, प्रसाद, पूजा सामग्री और छोटे कारोबारों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही सनातन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। क्रांतिकारियों की धरती बलिया को पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को योजनाबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया गया तो बलिया पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे आसपास के जिलों से आने वाले पर्यटकों के साथ-साथ बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित किया जा सकेगा। बेहतर बुनियादी ढांचे के निर्माण से इन स्थलों की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को नई पहचान मिलेगी। इससे जनपद की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित करने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार आस्था स्थलों के विकास को पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है। बलिया में स्वीकृत ये परियोजनाएं उसी नीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर इसे विकास, विरासत संरक्षण और रोजगार सृजन के त्रिस्तरीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में जनपद की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
