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बलिया: गोंड जाति प्रमाण-पत्र को लेकर बांसडीह तहसील पर सत्याग्रह जारी, प्रशासन ने 10 दिन का नोटिस देकर हटवाया धरना! प्रमुख सचिव के शासनादेश के अनुपालन की मांग, समान साक्ष्यों पर सभी पात्र आवेदकों को प्रमाण-पत्र जारी करने की उठी आवाज


बलिया/बांसडीह। गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र निर्गत करने में कथित अनियमितताओं और प्रमुख सचिव के शासनादेश के अनुपालन की मांग को लेकर बांसडीह तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह धरना सोमवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिन साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर चार व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी किया गया, उसी आधार पर अन्य पात्र गोंड समुदाय के लोगों को भी प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिए।

धरनारत लोगों का कहना था कि प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश समाज कल्याण अनुभाग-3 के शासनादेश संख्या 129ध्2021ध्3206ध्26-3-2021, दिनांक 3 नवंबर 2021 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवेदनकर्ता द्वारा प्रस्तुत भू-राजस्व अभिलेखों 1323, 1324, 1356 अथवा 1359 फसली में गोंड अंकित होने की पुष्टि मूल अभिलेखागार से होने पर अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। भूमिहीन आवेदकों के लिए परिवार रजिस्टर, विद्यालयीय अभिलेख तथा स्थानीय जांच-पड़ताल के आधार पर भी प्रमाण-पत्र निर्गत किए जाने का प्रावधान है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन निर्देशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं हो रहा। धरना स्थल पर पहुंचे उपजिलाधिकारी बांसडीह ने नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया और तहसीलदार, पुलिस उपाधीक्षक तथा पुलिस बल की मौजूदगी में धरना समाप्त कराया। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को जायज बताते हुए संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ऑनलाइन आवेदन लगातार निरस्त किए जाने से जनजाति वर्ग के छात्र-युवा उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति तथा विभिन्न सरकारी सेवाओं के आवेदन से वंचित हो रहे हैं। 

उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि पुराने भू-राजस्व अभिलेख, जन्म-मृत्यु रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड में गोंड जाति का उल्लेख होने के बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही है।

धरनारत लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सात अप्रैल 2026 को जिन चार व्यक्तियों को गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी किया गया, उसी प्रकार के साक्ष्यों के आधार पर अन्य पात्र लोगों को प्रमाण-पत्र क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने इस मामले में समानता के सिद्धांत के पालन और कथित दोहरे मापदंड समाप्त करने की मांग की।

सत्याग्रह में सुरेश शाह, उमाशंकर गोंड, रंगीला गोंड, प्रियांशु प्रसाद, विशाल गोंड, मनीष कुमार गोंड, शिवसागर गोंड, हरेकृष्ण गोंड, कन्हैया गोंड, रवि गोंड, जितेंद्र गोंड, छठू गोंड, अनिल गोंड, रामअवध गोंड और शशिकांत गोंड सहित कई लोग मौजूद रहे।

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