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पीलीभीतः आस्था के बीच सजी कन्या भोज की दिव्यता, खमरियापुल आश्रम में दिखा संस्कारों का विराट रूप! वैदिक हवन, पूजन-अर्चन और कन्याओं के सम्मान के साथ स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने दिया सेवा का संदेश


पीलीभीत। चैत्र नवरात्रि और रामनवमी के शुभ संयोग पर खमरियापुल स्थित श्री परमअक्रियधाम आश्रम में ऐसा आध्यात्मिक आयोजन देखने को मिला, जिसने श्रद्धा और सेवा दोनों को एक साथ जीवंत कर दिया। महामंडलेश्वर एवं विधायक स्वामी प्रवक्तानंद महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। दिन की शुरुआत मां भगवती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रों के बीच हवन से हुई। यज्ञ कुंड से उठती आहुति और वातावरण में घुलती भक्ति ध्वनि ने पूरे आश्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। स्वामी जी ने इस दौरान क्षेत्र की खुशहाली, शांति और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की।

कार्यक्रम का मुख्य केंद्र रहा कन्या पूजन और उसके बाद आयोजित भव्य कन्या भोज। छोटी बालिकाओं को देवी का रूप मानते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया गया। स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने स्वयं उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, तिलक लगाया और चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्हें पूड़ी, काले चने, हलवा, खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। बच्चों की खुशी को देखते हुए मिठाइयों के साथ चॉकलेट और टॉफियां भी वितरित की गईं। कन्या भोज के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन के साक्षी बने और प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। आश्रम परिसर में पूरे समय भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्ति का माहौल बना रहा।

स्वामी प्रवक्तानंद महाराज का सहज और स्नेहिल व्यवहार आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रहा। बच्चों के बीच उनकी आत्मीयता और श्रद्धालुओं से उनका जुड़ाव यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग से गहराई से जुड़ा हुआ है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नवरात्रि आत्मसंयम और साधना का पर्व है, जबकि कन्या पूजन समाज को यह याद दिलाता है कि नारी ही सृष्टि की आधारशक्ति है। उन्होंने लोगों से बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। साथ ही रामनवमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने मां भगवती से सभी के सुखद भविष्य और समाज की उन्नति की कामना की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्कार, सेवा और सामाजिक जागरूकता का प्रभावी संदेश देकर गया।

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