आगरा। नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस (कट्टी खाना) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां भैंसों के कटान के बाद निकलने वाला मलबा सीधे यमुना नदी में बहाया जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ने के साथ ही जलीय जीवों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। चर्चा यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जाता है कि मानकों को पूरा न करने के कारण नगर निगम का स्लॉटर हाउस करीब दो वर्षों तक बंद रहा था। बाद में इसके संचालन का ठेका ‘अल सुभान कंपनी’ को दिया गया। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आपत्तियों के बावजूद कथित तौर पर सेटिंग के जरिए पिछले एक महीने से इसे दोबारा संचालित किया जा रहा है।
आरोप है कि स्लॉटर हाउस में न तो वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है और न ही मलबे के निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद प्रतिदिन 250 से अधिक भैंसों का कटान किया जा रहा है, जिससे भारी मात्रा में निकलने वाला अपशिष्ट सीधे यमुना में पहुंच रहा है।
इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित जो भी आपत्तियां थीं, उनके दस्तावेज विभाग में जमा कराए जा चुके हैं। वहीं, वॉटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम की बताई। दूसरी ओर, नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अजय सिंह ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
बता दें कि वाराणसी में गंगा नदी में चिकन की हड्डी फेंकने के मामले में 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। इसके उलट आगरा में यमुना नदी में बड़े स्तर पर कटान का मलबा बहाए जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
