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हाथरसः सेवा और समर्पण की होली! निस्वार्थ सेवा संस्थान का सराहनीय प्रयास


हाथरस। होली का त्योहार सिर्फ रंग और गुलाल लगाने का नाम नहीं है। यह त्योहार लोगों को आपस में जोड़ने, प्यार बढ़ाने और भाईचारे का संदेश देने का मौका देता है। इसी भावना के साथ हाथरस की निस्वार्थ सेवा संस्थान ने हर साल की भांति इस बार भी होली का पर्व जरूरतमंद बच्चों के साथ मनाया और सेवा की एक सुंदर मिसाल पेश की।शहर के अलीगढ़ रोड पर स्थित नवग्रह मंदिर के पास रहने वाले बच्चों के साथ संस्था के सदस्य होली मनाने पहुँचे। इन बच्चों के लिए अक्सर त्योहार खास नहीं होते, क्योंकि उनके पास कपड़े, मिठाई या रंग खरीदने की सुविधा नहीं होती। लेकिन जब संस्था के लोग उनके बीच पहुँचे, तो माहौल पूरी तरह बदल गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देने लगी। संस्था के सदस्यों ने बच्चों को बड़े प्यार से गुलाल लगाया और उन्हें गले लगाया। बच्चों ने भी बहुत उत्साह के साथ होली खेली। वहाँ रंगों से ज्यादा प्यार और अपनापन नजर आ रहा था।कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नमकीन, बिस्किट और चॉकलेट भी बाँटी गईं। ये छोटी-छोटी चीजें पाकर बच्चे बहुत खुश हो गए। उनकी आँखों में चमक साफ दिखाई दे रही थी। कई बच्चों ने कहा कि उन्होंने पहली बार इस तरह सबके साथ मिलकर होली मनाई है

संस्था के सदस्य केवल सामान बाँटकर नहीं चले गए, बल्कि वे बच्चों के साथ बैठकर बातें करते रहे, उनके साथ खेल खेले और उन्हें अपनापन महसूस कराया। बच्चों को यह एहसास हुआ कि वे अकेले नहीं हैं और समाज में ऐसे लोग हैं जो उनकी खुशी के बारे में सोचते हैं। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि होली का असली मतलब सिर्फ रंग लगाना या मिठाई खाना नहीं है। होली हमें सिखाती है कि हमें आपसी भेदभाव मिटाकर एक-दूसरे से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य समाज के हर जरूरतमंद तक पहुँचना है और उन्हें खुशी देने की कोशिश करना है। संस्था यह कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से कर रही हैस

इस कार्यक्रम में अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, सचिव नीरज गोयल, सोशल मीडिया प्रभारी सारांश टालीवाल, सह सचिव निश्कर्ष गर्ग, ध्रुव कोठीवाल, आशीष अग्रवाल, सतेंद्र मोहन, अवधेश कुमार बंटी, रितिक बंसल, दीपांशु वार्ष्णेय, विशाल सोनी, यश वार्ष्णेय और अतीश अग्रवाल जैसे कई सदस्य मौजूद रहे और सभी ने मिलकर बच्चों के साथ खुशियाँ साझा कीं।


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