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यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले! अब किसी प्रॉपर्टी की फर्जी रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी


उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में आज कई बड़े फैसले लिए गए। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मंत्री ने बताया कि अब राज्य में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया गया है। धोखाधड़ी रोकने के लिए अब स्टाम्प पेपर तभी जारी होगा, जब विक्रेता यह साबित कर देगा कि वह उस संपत्ति का असली मालिक है। इसके लिए रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान 'खतौनी' (राजस्व रिकॉर्ड) से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। पहले केवल आधार कार्ड और पहचान पत्र के आधार पर स्टाम्प मिल जाता था, लेकिन अब इस नए नियम से किसी और की जमीन बेचना नामुमकिन होगा।

वहीं, परिवहन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने ऐलान किया कि प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को सीधे बस सेवा से जोड़ा जाएगा। सरकार की योजना है कि यूपी के हर गांव में दिन में कम से कम दो बार बसें उपलब्ध हों, जिससे ग्रामीणों का आवागमन सुगम हो सके। साथ ही, परिवहन विभाग ने ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए स्पष्ट किया है कि अब उन्हें उत्तर प्रदेश में अपना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना राज्य पंजीकरण के ये कैब अब यूपी की सीमाओं में संचालित नहीं हो सकेंगी।

प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए अब उन्हें हर साल अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी। इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी अपने 6 महीने के मूल वेतन से अधिक की राशि शेयर बाजार या अन्य किसी माध्यम में निवेश करता है, तो उसे इसकी सूचना सरकार को देना अनिवार्य होगा।

आवास के क्षेत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम आवास योजना की इमारतों की रंगाई-पुताई कराई जाएगी और ये आवास दलितों के लिए सुरक्षित रहेंगे; जो लोग अवैध रूप से इन आवासों में रह रहे हैं, उन्हें वहां से हटाया जाएगा। इसके साथ ही, अयोध्या में स्पोर्ट्स कालेज के लिए 2500 स्कॉयर मीटर जमीन दी जाएगी।

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