तेलंगाना सरकार का सख्त कानून! अब माता-पिता की देखभाल नहीं की तो काट ली जाएगी सैलरी
March 30, 2026
तेलंगाना विधानसभा ने रविवार (29 मार्च 2026) को एक अहम और सामाजिक रूप से प्रभावशाली विधेयक पारित किया. तेलंगाना एम्प्लॉइज अकाउंटेबिलिटी एंड मॉनिटरिंग ऑफ पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026 को बिना किसी विरोध के मंजूरी दे दी गई. इस कानून के तहत अब सरकारी, निजी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना अनिवार्य होगा. अगर कोई ऐसा नहीं करता तो उसे अपने वेतन का 15 फीसदी या न्यूनतम 10,000 प्रति माह माता-पिता को देना होगा.
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस विधेयक पर बोलते हुए सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि जो संतान अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करती, उसे समाज से बहिष्कृत किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ₹10,000 की सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि इससे अधिक राशि केंद्र सरकार के मौजूदा कानूनों के खिलाफ हो सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य केंद्र से इस सीमा को बढ़ाने की सिफारिश कर सकता है.
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करते हुए उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का उदाहरण दिया, जिनका हाल ही में निधन हो गया और अपने अंतिम समय में वे अपने ही बेटे के सहयोग के बिना जीवन बिताने को मजबूर थे. उन्होंने यह भी बताया कि वे एक पूर्व मंत्री को जानते हैं, जिन्होंने अपने पिता की उपेक्षा की थी. हाल ही में उस मंत्री के पिता के निधन पर कई विधायक शोक व्यक्त करने पहुंचे थे, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश छोड़ गई.
बीजेपी विधायक पायल शंकर ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुजुर्ग माता-पिता के कल्याण के लिए कानून बनाना पड़ रहा है, लेकिन उन्होंने इसे एक सराहनीय कदम बताया. उन्होंने मांग की कि जो लोग इस कानून का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार ने भी सरकार और मुख्यमंत्री की पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए एक आवश्यक कदम बताया.
यह कानून देश में अपनी तरह का पहला प्रयास माना जा रहा है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों को कानूनी रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब देखने वाली बात यह होगी कि इस कानून का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या यह वास्तव में बुजुर्गों की जिंदगी में सुधार ला पाएगा
