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पीलीभीतः होली पर संवेदनशील पहलरू शोक संतप्त परिवारों से मिले स्वामी प्रवक्तानंद महाराज! त्योहार के बीच मानवीय संवेदना का उदाहरण, कई गांवों में पहुंचकर परिवारों को बंधाया ढांढस


पीलीभीत। रंगों का पर्व होली सामान्यतः उत्सव और उमंग का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बरखेड़ा क्षेत्र में इस बार यह अवसर मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर आया। बरखेड़ा विधायक और महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने होली के अवसर पर क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचकर शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।

त्योहार के माहौल के बीच उन्होंने यह संदेश दिया कि समाज की वास्तविक शक्ति केवल उत्सव में ही नहीं, बल्कि दुख के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने में भी निहित होती है। इस दौरान उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और परिजनों को धैर्य व संबल बनाए रखने की प्रेरणा दी।स्वामी प्रवक्तानंद महाराज सबसे पहले समर्पित भाजपा कार्यकर्ता चन्द्रपाल दिवाकर के आवास पहुंचे। हाल ही में उनके पिता के निधन से परिवार गहरे शोक में था। महाराज ने परिवारजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।इसके बाद वे ग्राम नवादा महेश पहुंचे, जहां वीरेंद्र कुमार शर्मा के भाई के निधन पर परिवार को सांत्वना दी। इसी क्रम में ग्राम नरायनपुर में फूलचंद मौर्या के पिता के निधन पर उनके घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया।स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ग्राम पतरसिया भी पहुंचे, जहां स्वर्गीय गुप्ता जी और आकाश के परिवार से मिलकर उन्होंने शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में समाज का साथ ही व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

इसके बाद वे टिकरी मंडल अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव के घर पहुंचे। जनवरी माह में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में उनके पुत्र और भतीजे की मृत्यु हो गई थी। स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।इस दौरान उन्होंने बरखेड़ा के पूर्व चेयरमैन अशोक कुमार गुप्ता से भी मुलाकात की। हाल ही में उन्हें पक्षाघात होने की सूचना मिलने पर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज उनके आवास पहुंचे और उनका हालचाल जाना। उन्होंने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वह उन्हें जल्द स्वस्थ करें।अपने संबोधन में स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सुख-दुख दोनों परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ खड़ा रहना हमारी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी दिवंगत आत्माओं की शांति और उनके परिवारों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।      

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