आगरा। शहर के सेंट जॉर्जेज कॉलेज के पूर्व प्राचार्य जे.एस. जरमाया और उनके बेटे अक्षय पर स्कूल फीस से करोड़ों रुपये के गबन के लगे आरोपों की जांच फिलहाल केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मिशनरी स्कूल की फीस में बंदरबांट कर करोड़ों रुपये के घोटाले की शिकायत आगरा के कई विभागों में की गई, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बताया जाता है कि इस मामले की शिकायत महापौर हेमलता दिवाकर ने भी अपने लेटरपैड पर मंडलायुक्त को संबंधित अधिकारीयों की कमेटी गठित कर जाँच कर दोषियों के खिलाफ लिखा गया था, जिस पर मंडलायुक्त द्वारा जिलाधिकारी आगरा को कमेटी गठित कर निर्देशित किया गया था इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रभाव और पैसों की चमक के आगे महापौर का पत्र भी महज कागज का टुकड़ा बनकर रह गया।
मामले को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने भी जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन वह भरोसा अब तक कार्रवाई की राह ही देख रहा है। स्कूल की मान्यता समेत अन्य बिंदुओं को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी से भी शिकायत की गई थी, जिसके बाद दो खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम गठित कर जांच की बात कही गई। आरोप है कि यह टीम भी जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभा रही है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नामी अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने संबंधित लोगों को कार्यालय बुलाकर बयान दर्ज किए, लेकिन बिना किसी दस्तावेज के ही जांच आगे बढ़ती रही। न तो किसी स्कूल की मान्यता रद्द की गई और न ही किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये के गबन की शिकायतें अब तक केवल सरकारी फाइलों में दबकर रह गई हैं। आरोप यह भी स्कूल की फीस के करोडो रूपये का गबन कर इसपैसे को अन्य प्रदेशो मे भेज धर्मान्तरण मे भी प्रयोग किया गया है इसलिए बात की पुष्टि विजय कुमार नायक ने अपनी वेबसाइट मे खुद स्वीकार किया है चर्चनार्थ इंडिया के गठन 1970 के समय पहले इंडिया 6 चर्च को लेकर गठन किया गया था आज उडीसा मे ही 300चर्च बनाने का दावा आगरा विशव विजय कुमार नायक द्वारा स्वीकारा जा रहा है इस बात से साफ है की स्कूल फीस का प्रयोग धर्मान्तरण मे बड़े पैमाने पर किया जा रहा है । उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आगरा प्रशासन इस कथित बड़े घोटाले की जांच किस स्तर पर करता है या यह मामला भी केवल औपचारिक जांच बनकर रह जाएगा।
