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श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार खुला, 48 साल बाद शुरू हुई गिनती


पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की लंबे समय से प्रतीक्षित गिनती और सूचीकरण की प्रक्रिया आज से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई। इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरी तरह निर्धारित एसओपी के अनुसार किया जा रहा है। श्रीमंदिर रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने पुष्टि की कि इस प्रक्रिया में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई है।

सभी अधिकारियों ने परंपरा का पालन करते हुए सुबह लगभग 11:18 पर मंदिर के अंदर प्रवेश किया और कुछ ही समय में रत्नभंडार के अंदर भी प्रवेश किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान मंदिर के नियमित अनुष्ठान और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, भीतर काठ से सार्वजनिक दर्शन फिलहाल प्रतिबंधित रखा गया है। श्रद्धालु केवल बाहरा कथा से ही दर्शन कर सकेंगे।

श्रीमंदिर रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने कहा, 'आज गिनती का शुभ मुहूर्त आ गया है। पृथ्वी में जितने भी जगन्नाथ भक्त हैं। सभी की बड़ी इच्छा की यह काम जल्द से जल्द शुरू हो और भगवान की संपत्ति का एक लिखित रिकॉर्ड रहे। यह प्रक्रिया एक डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी। आज हम इन्वेंटरी की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। पहले हम चलंती भंडार से शुरू करेंगे। हम सभी से अनुरोध करेंगे कि भगवान से हमारे लिए प्रार्थ करें कि हम इस काम को अच्छे से शुरू करें और सही ढंग से समाप्त करें।'

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'रत्नभंडार के अंदर दो ग्रुप जाएंगे। एक सुपरवाइजरी ग्रुप और एक हैंडलिंग ग्रुप जाएंगे। इनमें जेमोलॉजिस्ट, सोनार, जौहरी,बैंक के अधिकारी, हाई लेवल कमिटी के सदस्य, मुख्य प्रशासक,कलेक्टर और एसपी शामिल हैं। इसमें कितना समय लगेगा नहीं पता। पहले 72 दिनों का समय लगा था। काम शुरू होकर जैसे जैसे आगे बढ़ेगा, वैसे वैसे आगे की प्रक्रिया साफ होती रहेगी। हम गिनती की डॉक्यूमेंटेशन, डिजिटाइजेशन,फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर रहे हैं। पूरी जानकारी लिपिबद्ध हो रही है ताकि भविष्य में सब सुरक्षित रहे। इन्वेंटरी की प्रक्रिया के दौरान भक्तों को किसी भी तरह की कोई असुविधा नहीं होगी। भक्त आएंगे और बाहर काठ से दर्शन कर के बाहर जाएंगे। भक्तों से हम सहयोग की आशा कर रहे हैं।'

इस सूचीकरण प्रक्रिया के तहत मंदिर के आभूषणों की गिनती, वजन और पहचान की जा रही है। इसके बाद इनका मिलान साल 1978 के रिकॉर्ड से किया जाएगा। आभूषणों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए दो जेमोलॉजिस्ट भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। साथ ही प्रत्येक आभूषण की डिजिटल फोटोग्राफी कर दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।

चुनर सेवायत डॉक्टर सरत महांति ने कहा, 'हमारे मन में बहुत आनंद है क्योंकि बहुत दिनों से बंद पड़ा भगवान जगन्नाथ के आभूषणों से भरे रत्नभंडार की गिनती हो रही है। गिनती के बाद टेबुलेशन की प्रक्रिया भी आज से शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया के लिए हमारे जेमोलॉजिस्ट अंदर गए हुए हैं। मंदिर प्रशासन के नीति प्रशासक,डेवलपमेंट प्रशासक, भंडार रक्षक और तड़ाऊ सेवायत अंदर गए हुए हैं। सभी बैठकर आपस में बैठकर चर्चा करेंगे और अलग अलग चरणों में यह कम किया जाएगा। पहले भगवान जगन्नाथ का नित्य व्यवहार होने वाले आभूषणों का आकलन किया जाएगा। उसके बाद जो व्यवहार नहीं किया जाते, उसके आकलन की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रक्रिया का टेबुलेशन और डॉक्यूमेंटेशन किया जाएगा और प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद जानकारी को सार्वजनिक की जाएगी।'

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