आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन एवं शिक्षा दृष्टिकोण पर विशेष आयोजन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण के साथ हुई।
विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी ने माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही अंत्योदय की भावना को सशक्त बनाया जा सकता है तथा विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।
इस अवसर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की भतीजी डॉ. मधु शर्मा एवं डॉ. माला शर्मा ने भी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में पंडित जी के व्यक्तित्व, उनके शैक्षिक दृष्टिकोण तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान पर सारगर्भित विमर्श हुआ।
संस्थान में संरक्षित पं. दीनदयाल उपाध्याय की अंकतालिकाओं एवं राष्ट्रोन्नति से जुड़े उनके योगदान की सामग्री को व्यवस्थित रूप से संग्रहित करने पर भी विचार किया गया।
डॉ. मधु शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी पुस्तक “पं. दीनदयाल उपाध्यायरू राजनीति की पाठशाला” में पंडित जी की बाल्यावस्था, जीवन, व्यक्तित्व और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता को भावी पीढ़ी के मार्गदर्शन हेतु प्रस्तुत किया है।
उन्होंने पंडित जी के मंत्र “प्रकृति का दोहन नहीं, संरक्षण करो” को मूर्त रूप देने हेतु संस्थान में प्लास्टिक एवं पॉलीथिन रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देकर कौशल विकास के साथ प्रकृति संरक्षण के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया।
विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी ने माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही अंत्योदय की भावना को सशक्त बनाया जा सकता है तथा विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।
इस अवसर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की भतीजी डॉ. मधु शर्मा एवं डॉ. माला शर्मा ने भी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में पंडित जी के व्यक्तित्व, उनके शैक्षिक दृष्टिकोण तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान पर सारगर्भित विमर्श हुआ।
संस्थान में संरक्षित पं. दीनदयाल उपाध्याय की अंकतालिकाओं एवं राष्ट्रोन्नति से जुड़े उनके योगदान की सामग्री को व्यवस्थित रूप से संग्रहित करने पर भी विचार किया गया।
डॉ. मधु शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी पुस्तक “पं. दीनदयाल उपाध्यायरू राजनीति की पाठशाला” में पंडित जी की बाल्यावस्था, जीवन, व्यक्तित्व और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता को भावी पीढ़ी के मार्गदर्शन हेतु प्रस्तुत किया है।
उन्होंने पंडित जी के मंत्र “प्रकृति का दोहन नहीं, संरक्षण करो” को मूर्त रूप देने हेतु संस्थान में प्लास्टिक एवं पॉलीथिन रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देकर कौशल विकास के साथ प्रकृति संरक्षण के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया।
