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संग्रामपुर: ...अब मोबाइल से होगा समूहों के पैसों का लेखा-जोखा


संग्रामपुर/अमेठी। ग्रामीण अंचल के आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए, विकास खंड भेटुआ में आयोजित त्रि-दिवसीय लोकोस कार्य-प्रणाली प्रशिक्षण बुधवार को पूर्ण गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मूल संकल्प स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों एवं संकुल स्तरीय संघों के मध्य होने वाले वित्तीय विनिमय को पूर्णतः अभिलिखित और पारदर्शी बनाना है। बिहार के गया जनपद से पधारे दक्ष प्रशिक्षक संजय कुमार यादव एवं अंकित कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वित्तीय लेखांकन के आधुनिक आयामों से परिचित कराया। उन्होंने प्रयोगात्मक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि किस प्रकार सांख्यिकीय आंकड़ों का शुद्ध प्रलेखन, ग्रामीण वित्तीय ढांचे को अधिक विश्वसनीय और जवाबदेह बना सकता है। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु में प्रत्येक मौद्रिक लेन-देन को तत्काल इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करना। लेखा-जोखा में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर त्रुटिहीन गणना सुनिश्चित करना।ग्राम स्तर पर होने वाले व्यय और आय का स्पष्ट विवरण सुलभ कराना। खंड मिशन प्रबंधक दुर्गेश नंदन शुक्ल ने अवगत कराया कि इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र की 47 ग्राम पंचायतों से आईं समूह सखियों ने सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने बल देते हुए कहा कि प्रशिक्षणोपरांत ये सखियाँ अब अपने क्षेत्रों में जाकर वित्तीय अनुशासन का मार्ग प्रशस्त करेंगी। इससे न केवल ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी बिना किसी बाधा के पात्रों तक पहुँच सकेगा। समापन के अवसर पर प्रशिक्षित महिलाओं ने इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। प्रतिभागियों का मानना है कि इस नवीन कार्यप्रणाली को अपनाने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और अब वे अपने समूह के कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में सक्षम हैं। भेटुआ में संपन्न यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता का परिचायक है। जहाँ तकनीक और सुशासन का समन्वय होता है, वहाँ प्रगति स्वतः ही सुनिश्चित हो जाती है।

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