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संग्रामपुर: बैकयार्ड पोल्ट्री डेवलपमेंट! विशेष वितरण कार्यक्रम का आयोजन


संग्रामपुर/अमेठी। जनपद में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं पारंपरिक कृषि के इतर अतिरिक्त आय के स्रोतों को विकसित करने के ध्येय से, उत्तर प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी बैकयार्ड पोल्ट्री डेवलपमेंट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक विशेष वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरुवार को राजकीय पशु चिकित्सालय अमेठी एवं राजकीय पशु चिकित्सालय संग्रामपुर के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से चयनित लाभार्थियों को कुक्कुट इकाइयों का आवंटन कर स्वरोजगार की दिशा में अग्रसर किया गया। योजना के निर्धारित मानकों एवं विधिक दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए, इस चरण में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति के 29 प्रगतिशील कृषकों को लाभान्वित किया गया। प्रशासन का यह कदम सामाजिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप लक्षित वर्ग के आर्थिक उत्थान एवं आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अधिष्ठान है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप पांडे ने योजना की विधिक संरचना एवं वित्तीय प्रावधानों से अवगत कराया।प्रत्येक चयनित लाभार्थी कृषक को उन्नत प्रजाति के 50 चूजे निशुल्क प्रदान किए गए हैं।चूजों के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु आवश्यक कुक्कुट आहार के साथ-साथ उनके सुरक्षित आवास के निर्माण हेतु प्रति इकाई 300 की विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया एवं पारदर्शी भुगतान योजना के अंतर्गत देय 425 की कुल सब्सिडी राशि को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित किया गया है, जिससे वित्तीय सुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। डॉ. पांडे ने कहा कि इस योजना का मूल उद्देश्य न केवल ग्रामीण अंचलों में स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करना है, बल्कि स्वदेशी कुक्कुट नस्लों का संरक्षण करना भी है। यह परियोजना कुक्कुट पालन को एक लघु उद्योग के रूप में स्थापित कर किसानों की क्रय शक्ति में वृद्धि करने का एक प्रभावी तंत्र है। संग्रामपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामों, यथा बड़गांव, सरैया कनू, नेवादा कनू एवं अन्य समीपवर्ती क्षेत्रों के कृषकों ने इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त किया। विभाग द्वारा लाभार्थियों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे पशु चिकित्सालय के निरंतर संपर्क में रहें ताकि टीकाकरण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से कुक्कुट मृत्यु दर को न्यूनतम रखा जा सके।

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