गौरीगंज/अमेठी। विकास के गगनभेदी दावों के बीच अमेठी जनपद का सरैया डुबान गाँव आज भी मध्यकालीन दुश्वारियों से जूझ रहा है। वर्षों से पक्की सड़क और खड़ंजे की बाट जोह रहे ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। मंगलवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन करते हुए आगामी चुनावों में पूर्ण वोट बहिष्कार का शंखनाद कर दिया है। स्थानीय निवासी हरिपूजन सिंह ने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पीढ़ियां बीत गईं, मगर गाँव की मिट्टी पक्की सड़क में तब्दील न हो सकी। ग्रामीण आज भी आदिम युग की तरह मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाने को अभिशप्त हैं। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता का प्रमाण है जो कागजों पर तो सड़कें चमकाता है, मगर हकीकत में एंबुलेंस तक को रास्ता नहीं दे पाता। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक ओर बुनियादी ढांचा नहीं है, तो दूसरी ओर निजी स्वार्थ के चलते सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है। जया सिंह के अनुसार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के हस्तक्षेप के बावजूद कुछ रसूखदार लोगों ने रास्ते में गड्ढे खुदवाकर निर्माण कार्य रुकवा दिया है। प्रशासन की इस शिथिलता ने अराजक तत्वों के हौसलों को और अधिक बल दिया है। गाँव की व्यथा बयां करते हुए प्रियंका सिंह भावुक हो उठीं। उन्होंने बताया कि घर में वैवाहिक आयोजन है, किंतु मार्ग के अभाव में बारातियों का स्वागत खेतों की पगडंडियों पर करने की विवशता है। वहीं, लक्ष्मी कोरी की पीड़ा और भी गंभीर है, प्रसव का समय निकट है और एंबुलेंस का घर तक आना असंभव। ग्राम प्रधान द्वारा पल्ला झाड़ लेने के बाद अब ग्रामीण स्वयं को लावारिस महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि मतदान की तिथि से पूर्व सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर प्रारंभ नहीं हुआ, तो पूरा गाँव अपने लोकतांत्रिक अधिकार मताधिकार का त्याग कर प्रशासन को आईना दिखाएगा।
गौरीगंज: ग्रामीणो का हल्लाबोल! सड़क नहीं तो वोट नहीं
February 10, 2026
गौरीगंज/अमेठी। विकास के गगनभेदी दावों के बीच अमेठी जनपद का सरैया डुबान गाँव आज भी मध्यकालीन दुश्वारियों से जूझ रहा है। वर्षों से पक्की सड़क और खड़ंजे की बाट जोह रहे ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। मंगलवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन करते हुए आगामी चुनावों में पूर्ण वोट बहिष्कार का शंखनाद कर दिया है। स्थानीय निवासी हरिपूजन सिंह ने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पीढ़ियां बीत गईं, मगर गाँव की मिट्टी पक्की सड़क में तब्दील न हो सकी। ग्रामीण आज भी आदिम युग की तरह मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाने को अभिशप्त हैं। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता का प्रमाण है जो कागजों पर तो सड़कें चमकाता है, मगर हकीकत में एंबुलेंस तक को रास्ता नहीं दे पाता। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक ओर बुनियादी ढांचा नहीं है, तो दूसरी ओर निजी स्वार्थ के चलते सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है। जया सिंह के अनुसार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के हस्तक्षेप के बावजूद कुछ रसूखदार लोगों ने रास्ते में गड्ढे खुदवाकर निर्माण कार्य रुकवा दिया है। प्रशासन की इस शिथिलता ने अराजक तत्वों के हौसलों को और अधिक बल दिया है। गाँव की व्यथा बयां करते हुए प्रियंका सिंह भावुक हो उठीं। उन्होंने बताया कि घर में वैवाहिक आयोजन है, किंतु मार्ग के अभाव में बारातियों का स्वागत खेतों की पगडंडियों पर करने की विवशता है। वहीं, लक्ष्मी कोरी की पीड़ा और भी गंभीर है, प्रसव का समय निकट है और एंबुलेंस का घर तक आना असंभव। ग्राम प्रधान द्वारा पल्ला झाड़ लेने के बाद अब ग्रामीण स्वयं को लावारिस महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि मतदान की तिथि से पूर्व सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर प्रारंभ नहीं हुआ, तो पूरा गाँव अपने लोकतांत्रिक अधिकार मताधिकार का त्याग कर प्रशासन को आईना दिखाएगा।
