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संग्रामपुर: शिक्षा के मंदिर पर ताला, छात्रो के भविष्य से खिलवाड़


संग्रामपुर/अमेठी। शिक्षा का अधिकार जहाँ प्रत्येक बालक को निर्बाध ज्ञानार्जन की गारंटी देता है, वहीं अमेठी जनपद के भेटुआ विकास खंड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज पिण्डोरिया की वर्तमान स्थिति विभागीय संवेदनहीनता की एक नई गाथा लिख रही है। सोमवार मध्याह्न विद्यालय के मुख्य द्वार पर लटका ताला न केवल एक भवन की बंदी का प्रतीक है, बल्कि उन सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर जड़ा गया एक प्रश्नचिह्न है, जो अपनी वार्षिक परीक्षाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विद्यालय में कक्षा नवमीं और ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, किंतु कक्षा छठी, सातवीं और आठवीं के छात्र अब तक परीक्षा से वंचित हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय पर विद्यालय का पूर्णतः बंद पाया जाना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर विधिक और नैतिक प्रश्न खड़े करता है। जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार द्विवेदी का तर्क है कि बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्थाओं के दृष्टिगत विद्यालय को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। किंतु प्रशासनिक न्यायोचितता के दृष्टिकोण से यह तर्क अपूर्ण प्रतीत होता है। क्या एक परीक्षा के आयोजन के निमित्त अन्य कक्षाओं के शैक्षणिक सत्र की आहुति दी जा सकती है? किसी भी सार्वजनिक संस्थान की कार्यक्षमता उसकी उत्तरदेयता से मापी जाती है। पिण्डोरिया राजकीय इंटर कॉलेज की यह स्थिति निम्नलिखित विसंगतियों को रेखांकित करती है। कक्षा छह से आठ तक के छात्रों का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन अभी शेष है। सत्र के अवसान के समीप विद्यालय की बंदी उनके अधिगम की निरंतरता को खंडित करती है।बोर्ड परीक्षाओं का महत्त्व निर्विवाद है, परंतु अन्य कक्षाओं को श्अदृश्यश् मान लेना शिक्षा के समावेशी स्वरूप के विरुद्ध है।छात्रों और अभिभावकों के मध्य व्याप्त इस अनिश्चितता ने तंत्र के प्रति अविश्वास उत्पन्न किया है।

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