मोदी सरकार ने 114 नए राफेल जेट्स की डील को दी मंजूरी
February 12, 2026
भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होने जा रहा है। और इसके लिए मोदी सरकार ने फ्रांस से नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। पूरी दुनिया ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फाइटर जेट राफेल का दम देखा था कि कैसे भारत ने पाकिस्तान पर एयर डॉमिनेंस बनाए रखा था। और पलक झपकते ही पाकिस्तान का नूर खान समेत तमाम एयरबेस पर अटैक किया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दी गई है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने प्रमुख उच्च-मूल्य रक्षा खरीद के लिए Acceptance of Necessity दे दी है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सशस्त्र सेनाओं के अलग-अलग प्रस्तावों के लिए करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित कीमत की मंजूरी दी गई। फ्रांस से राफेल वाली डील के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील को मंजूरी मिली है। इसमें 2.5 लाख करोड़ रुपये, 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए और शेष राशि हथियारों, पुर्जों और सहायक पैकेजों के लिए है।
खरीदे जाने वाले ज्यादा MRFA राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा। कॉम्बैट मिसाइलें स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता को गहरी मारक ताकत और अत्यधिक सटीकता के साथ मजबूत करने वाली हैं। वहीं, AS-HAPS का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए होगा।
साथ ही, 6 पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों के लिए भी मंजूरी मिली है जो लगभग 28 हजार करोड़ रुपये के होंगे। भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन और समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए High Altitude Platform Systems खरीदे जाएंगे जो करीब 15 हजार करोड़ रुपये के होंगे। यह खुफिया, निगरानी और टोही के लिए महत्वपूर्ण होगा।
भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों को खरीदा था, जिसकी डिलीवरी दिसंबर, 2024 में पूरी हो गई थी। ये लड़ाकू विमान IAF के 2 स्क्वाड्रनों- अंबाला में 'गोल्डन एरोज' और हाशिमारा में 'फाल्कन्स' में हैं। राफेल में घातक हथियार प्रणाली होती है। यह Meteor मिसाइल से लैस है जो हवा से हवा में मार करने वाली विश्व की सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर से ज्यादा है।
राफेल में SCALP मिसाइल भी है, जो हवा से जमीन पर मार करने वाली एक तरह की क्रूज मिसाइल है, जो 300-500 किलोमीटर दूर मौजूद शत्रु के बंकरों और ठिकानों को निशाना बना सकती है। हैमर मिसाइल से भी राफेल लैस है। यह एक कम दूरी की मिसाइल है जो मजबूत ढांचों को बर्बाद करने के लिए खास रूप से डिजाइन की गई है।
राफेल फाइटर जेट में RBE2 AESA रडार है जो एक साथ 40 टारगेट्स को ट्रैक करने में सक्षम है। इसमें SPECTRA सिस्टम भी है, जो एक ताकतवर इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणाली है जो जेट को दुश्मन के रडार से बचाने और खतरों को जैम करने में सहायता करता है। इसमें हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले भी है। इसकी मदद से पायलट अपने हेलमेट से डेटा देख पाता है।
इससे पहले भारत ने अप्रैल, 2025 में 26 राफेल-मरीन जेट के लिए भी फ्रांस से सौदा किया था। ये डील 63 हजार करोड़ रुपये की थी। ये राफेल जेट विमानवाहक पोतों से उड़ने की क्षमता रखते हैं और इन्हें नेवी मिशन के लिए तैयार किया गया है। इस डील में ट्रेनिंग, हथियार, सिमुलेटर और दीर्घकालिक सहायता शामिल है। राफेल-एम को INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा।
