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संग्रामपुर: ड्यूटी का समय 11.30 बजे! चिकित्सालय से डॉक्टर नदारद, केवल कागजों पर ही सक्रिय पशुपालन विभाग


संग्रामपुर/अमेठी। प्रदेश सरकार भले ही पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर बड़े दावे कर रही हो, परंतु धरातल पर प्रशासनिक उदासीनता इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ताजा मामला जनपद के भेटुआ स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय का है, जहाँ कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।सोमवार को दिन के पूर्वाह्न 11रू30 बजे जब पशुपालक अपने बीमार पशुओं को लेकर चिकित्सालय पहुँचे, तो वहाँ सन्नाटा पसरा हुआ था। अस्पताल परिसर में कोई भी जिम्मेदार चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। पशुपालकों का आरोप है कि निर्धारित समय होने के बावजूद डॉक्टर की अनुपलब्धता एक दैनिक परिपाटी बन चुकी है, जिससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को भारी निराशा और आर्थिक क्षति झेलनी पड़ रही है।पशुपालन क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मूक पशुओं के स्वास्थ्य के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाता है। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र और चिकित्सालय की संयुक्त इकाई होने के बावजूद, समय पर उपचार न मिलना क्षेत्र के दुग्ध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। सरकारी संस्थानों में श्बायोमेट्रिक उपस्थितिश् और श्जवाबदेहीश् के कड़े नियमों के बावजूद भेटुआ चिकित्सालय की यह स्थिति चिंताजनक है। क्या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी इस लापरवाही का संज्ञान लेकर दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा? यह एक बड़ा प्रश्न है।

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