बाबरी यात्रा से पहले बढ़ी सियासी गर्मी! हुमायूं कबीर के समधी की 11 करोड़ की संपत्ति जब्त
February 10, 2026
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है. लालगोला थाने की पुलिस ने बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े रहे और जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर की बेटी के ससुर शरीफुल इस्लाम की करीब 11 करोड़ रुपये (10.73 करोड़ से ज्यादा) की संपत्ति जब्त कर ली है. यह कार्रवाई बाबरी यात्रा से ठीक पहले की गई है, जिससे सियासी हलचल भी तेज हो गई है.
पुलिस के मुताबिक, शरीफुल इस्लाम मादक पदार्थों की अवैध तस्करी में शामिल थे और इसी से उन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाई. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने संबंधित अधिकारियों से संपत्ति जब्त करने की अनुमति मांगी थी. आदेश मिलने के बाद सोमवार से जब्ती की प्रक्रिया शुरू की गई.
लालगोला पुलिस ने कुल 17 संपत्तियों को जब्त किया है. इनमें जमीन, मकान, एक स्कूल और एक लॉज शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि लालगोला इलाके में स्थित एक घर, स्कूल और लॉज को भी सील कर दिया गया है. जब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत करीब 11 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
पिछले साल पुलिस ने शरीफुल इस्लाम के एक रिश्तेदार जियाउर रहमान को गिरफ्तार किया था. उसके पास से करीब 500 ग्राम नशीला पदार्थ बरामद हुआ था, जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये आंकी गई थी. इसी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस पूरे नेटवर्क का सुराग मिला और जांच आगे बढ़ी.
पुलिस जांच में सामने आया कि शरीफुल इस्लाम भी नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थे. पुलिस का दावा है कि इस अवैध धंधे से उन्होंने कई करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई, जिसे अब जब्त किया गया है.
इस कार्रवाई पर जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर को नई राजनीतिक पार्टी बनाने के बाद जानबूझकर उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है.
हुमायूं कबीर का कहना है कि पुलिस ने उनकी बेटी, दामाद और बेटी के ससुर के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए हैं. उन्होंने साफ कहा कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ अदालत का रुख करेंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
बाबरी यात्रा से पहले हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है. एक तरफ पुलिस इसे ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर हुमायूं कबीर इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रहे हैं.
