सोनभद्र। रावर्ट्सगंज तहसील में जिस तरह से गरीबों को पट्टा दिये जाने के नाम पर भूमाफियाओं को फर्जी पट्टा दिया जा रहा है यह निश्चित तौर पर सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है । उक्त बातें भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉक्टर धर्मवीर तिवारी ने कही डा0 धर्मवीर तिवारी ने गुरुवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की और रावर्ट्सगंज तहसील की कार्यप्रणाली सहित लसड़ा ग्राम में जारी फर्जी पट्टे पर उन्हें अवगत कराया। धर्मवीर तिवारी ने कहा कि रावर्ट्सगंज तहसील में भूमाफिया हावी हैं और उन्हें अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने बताया कि यहां के तहसीलदार, कानूनगो व लेखपाल भूमाफिया से मिलकर किसानों की जमीनों को औने-पौने दामों में खरीदवा कर बिना नियम को ध्यान में रखते हुए प्लाटिंग करवा रहे हैं। किसानों से सस्ते दामों में जमीन एग्रीमेंट करा कर उसे महंगे दामों में बेचा जा रहा है। ग्राम लसड़ा में अपात्र को फर्जी पट्टा दिये जाने के विषय पर उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि न सिर्फ पैसे का खेल कर फर्जी पट्टा दिया गया बल्कि पास में सिरोही नदी के अस्तित्व को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने कहा कि सदर तहसील में काफी दिनों से राजस्व मामले में हेरा-फेरी करने की शिकायत आ रही है । उन्होंने जिलाधिकारी को साक्ष्य भी बताये जो क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान उनके सज्ञान में लाया गया। उन्होंने बताया कि रावर्ट्सगंज तहसील के ग्राम रसड़ा अक्षर में बांध की जमीन को अपात्र व्यक्तियों को पट्टा कर दिया गया। दिए गए पट्टों के पीछे एक बड़े पैमाने पर सोची - समझा षड्यंत्र किया गया । दरअसल रावर्ट्सगंज-पन्नूगंज सड़क जिसकी फोर लेन बनने की संभावना है, उस स्थिति में सड़क के किनारे किये गए पट्टे की जमीन की कीमत करोड़ों रुपए की हो जायेगी, जिसका मिलकर बंदरबाँट किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि अक्षर ग्राम पंचायत में सिरोही नदी पुरानी है जो लगातार बहती चली आ रही थी जिसे भू माफियाओं ने पाट कर कब्जा करके रखा हुआ है। कुछ लोगों की बाउंड्री व घर भी बने हुए हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में सिरोही नदी का अस्तित्व बचाना अत्यंत आवश्यक है
धर्मवीर तिवारी ने बताया कि सदर तहसीलदार के द्वारा अवैध रूप से धन उगाही करके जमीन का प्लाटिंग करने वालों के साथ मिलकर अवैध संपत्ति कमाई गई है जिसका ट्रांजैक्शन भी तहसील के एक कर्मचारी के खाते के द्वारा किया गया है। जिनके खाते में पैसा गया है उनका नाम शुभांशु है जबकि प्लाटिंग करने वाले का नाम शमसुद्दीन शहाबुद्दीन और सलीम है। इन सभी के संपत्ति की जांच होनी चाहिए। इसी तरह का प्रकरण मुसही में राजा साहब की जमीन थी जो विश्वकर्मा के नाम से थी । ऐसे छोटे विवाद की जमीन को तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर विवादित बनाकर उलझाया गया है। डा0 धर्मवीर तिवारी ने कहा कि लसड़ा के पट्टा प्रकरण में कानूनगो, लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम के भूमिका की गहनता से जांच कराकर कड़ी कार्रवाई करने आवश्यकता है। साथ ही इन लोगों के संपत्ति की भी जांच कराई जाए। ताकि जो लोग सरकार की छवि बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं उन्हें उसका दंड मिलना चाहिए।
