सोनभद्र। अत्यधिक ठंड व शीत लहरी को देखते हुए लगभग 85 -90 महिलाओं व पुरुषों को कपड़े,कंबल व मिठाइयां वितरित किया गया ।जब हम लोगों ने आश्रम में प्रवेश किया तो सभी के चेहरे पर एक आश बंधी गयी थी कि हम लोगों से मिलने के लिए हमारे अपने हमारे लिए जरूर ही ठंड की कुछ व्यवस्था लेकर आये होंगे ।सभी वृद्ध हम सबको देखकर बहुत खुश हुए। हम सब ने उनका हाल-चाल लिया। उनसे विस्तार में बातें भी की व कई लोगों की आंखें भी भर आई जब उन लोगों ने यह बताया कि उनके ही बच्चों ने उन्हें यहां पर छोड़ दिया है और कभी खबर भी नहीं लिया। ऐसी स्थिति में हम सिर्फ सांत्वना ही दे सकते थे। मंच की अध्यक्षा रितु जालान ने सभी वृद्धो को नव वर्ष की बधाई दी व कहा कि यदि यह वृद्ध माता-पिता इस आश्रम में रह रहे हैं तो कहीं ना कहीं हम सब भी जिम्मेदार हैं। शायद परिवार व समाज से संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं इसी का यह परिणाम है ।दूसरी ओर एकल परिवार का चलन भी बहुत कुछ जिम्मेदार है।मंच की महामंत्री रंजना अग्रवाल ने बताया कि यदि हम परिवार और समाज में लुप्त हो रहे संस्कारों की बात नहीं करेंगे और अपने बच्चों को हमारा हिंदू धर्म परिवारवाद का ज्ञान नहीं देंगे तो वह दिन दूर नहीं है कि भारत में वृद्धाश्रम की संख्या सबसे ज्यादा होगी।अतः हम सबको मिलकर इस पर चिंतन करना होगा। इस अवसर पर रितु जालान , रंजना अग्रवाल, चित्रा चालान, प्रतिभा कानोड़िया, अनीता थर्ड,पूनम खेतान, प्रियंका चौबे, विनोद जालान , आदि लोग उपस्थित रहे।
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