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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले NDA में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय! अमित शाह–EPS की अहम बैठक


तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है. गृहमंत्री अमित शाह NDA के घटक दलों के नेताओं के साथ लगातार बात कर रहे हैं. बुधवार देर रात एआईएडीएमके के नेता ई पलानीस्वामी के साथ अमित शाह की मुलाकात हुई और उसमें सीट शेयरिंग के साथ साथ राज्य में NDA के विस्तार को लेकर चर्चा हुई. इसके साथ साथ अम्बुमनी रामदास की पार्टी पीएमके भी NDA का हिस्सा बन गई है. सूत्रों के मुताबिक पीएमके को 17 विधानसभा और 1 राज्यसभा देने पर सहमति बनी है.'

सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात में बीजेपी, AIADMK और पीएमके के बीच सीटों के बंटवारे, साझा रणनीति और चुनावी समन्वय पर चर्चा हुई है. इसके साथ बैठक में NDA में राज्य के अन्य दलों को भी शामिल करके गठबंधन के विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई है. बीजेपी जहां तमिलनाडु में एनडीए को एक मजबूत और संगठित विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं AIADMK गठबंधन की धुरी बने रहकर अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र को सुरक्षित रखना चाहती है.

पीएमके का वन्नियार वोट बैंक उत्तर और मध्य तमिलनाडु में निर्णायक माना जाता है. ऐसे में सीमित लेकिन प्रभावी सीटें देकर एनडीए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है. वहीं, राज्यसभा सीट का आश्वासन पीएमके नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का संकेत माना जा रहा है.

2021 विधानसभा चुनाव का संदर्भ भी इस रणनीति को समझने में अहम है. 2021 में AIADMK और भाजपा ने एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में एनडीए को कुल 75 सीटें मिली थीं, जिनमें AIADMK ने 66 और बीजेपी ने 4 सीटें जीती थीं. वोट शेयर की बात करें तो डीएमके को करीब 38 प्रतिशत वोट मिले थे, जो सबसे अधिक था. AIADMK को लगभग 33 प्रतिशत, कांग्रेस को 4 से 4.3 प्रतिशत, जबकि बीजेपी को करीब 2.6 प्रतिशत वोट मिले थे.

गृहमंत्री अमित शाह कुछ दिन पूर्व ही तमिलनाडु के दौरे पर थे और वहां उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया . गृह मंत्री ने न सिर्फ एक बड़ी सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, बल्कि बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक भी ली. इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी राज्य में संगठन और चुनावी रणनीति दोनों मोर्चों पर आक्रामक तैयारी में है. गृहमंत्री का इस बार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों पर खास तौर पर फोकस रहने वाला है. आगामी दिनों में भी अमित शाह तमिलनाडु के लगातार दौरे करते हुए नजर आएंगे.

बीजेपी इस बार कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई पर खास फोकस कर रही है. पार्टी ने पारंपरिक रूप से शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में अपनी पैठ बनाई है. कोयंबटूर की दो सीटों पर बीजेपी मजबूती से दावा ठोक रही है, जबकि चेन्नई महानगर की 3 से 4 सीटों पर पार्टी की नजर है, जहां मध्यम वर्गीय मतदाता और हिंदी भाषी आबादी निर्णायक भूमिका में मानी जाती है.

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह की रणनीति सिर्फ बीजेपी को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एनडीए को चुनावी तौर पर अभेद्य बनाने की है. इसी कड़ी में बीजेपी, AIADMK के दोनों धड़ों—टीटीवी दिनाकरन और ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) को EPS के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में वापस लाने की कोशिश कर रही है. अगर यह सियासी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सफल होती है, तो डीएमके के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी तय मानी जा रही है. रामेश्वरम रीजन में भी पार्टी इसी समीकरण के तहत उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है. इसके साथ साथ साथ बीजेपी फिल्मस्टार विजय की पार्टी पर भी नजर बनाए हुए हैं जरूरत पड़ने पर उनकी पार्टी को भी NDA में शामिल करने पर भी चर्चा की जा सकती है.

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