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CID को सौंपा जा सकता है सीजे रॉय की आत्महत्या का केस


कन्फिडेंट ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सीजे रॉय की इनकम टैक्स छापों के दौरान हुई कथित आत्महत्या के बाद मामले की गहराई से जांच की मांग तेज हो गई है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, 31 जनवरी की शाम या 1 फरवरी की सुबह तक यह केस अशोक नगर पुलिस स्टेशन से राज्य की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) को सौंप दिया जाएगा। रॉय का अंतिम संस्कार रविवार को बेंगलुरु में होगा और परिवार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

सीजे रॉय के भाई सीजे बाबू ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए जोर देकर कहा कि इनकम टैक्स जांच के अलावा कोई अन्य समस्या नहीं थी। उन्होंने कहा, 'इनकम टैक्स से जुड़े मुद्दे के अलावा और कोई समस्या नहीं थी। इस बारे में मैं पूरी तरह निश्चित हूं।' बाबू ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को सुबह 10:40 बजे रॉय से आखिरी बार बात की थी, और अब वह ऑफिस स्टाफ से और जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले, रॉय की पत्नी लीना और उनके बेटे रोहित बेंगलुरु के बॉवरिंग अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचे थे, जहां कर्नाटक प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष मोहम्मद नलपाड़ भी उनके साथ थे।

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सरकार की ओर से सच्चाई सामने लाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा, 'जब इनकम टैक्स के अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे थे, तब उन्होंने 5 मिनट मांगे, अंदर गए और खुद को गोली मार ली। हम उच्च स्तरीय जांच करेंगे। केरल से एक टीम यहां आई है; जांच से और विवरण सामने आएंगे। ऐसा नहीं होना चाहिए था। वह एक अच्छे व्यवसायी थे। दिल्ली ने भी रिपोर्ट मांगी है। विस्तृत जांच के बाद, हमारी सरकार लोगों को सच्चाई बताएगी।' सूत्रों के मुताबिक, अशोक नगर स्टेशन से यह केस CID को ट्रांसफर किया जा सकता है, ताकि राजनीतिक हलकों और जनता की नजरों में निष्पक्षता बनी रहे।

केरल के विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने सीजे रॉय की मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि यह संदिग्ध लगता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक व्यवसायी ईडी छापे से नहीं डरता। इस मामले में लग रहा है कि रूटीन जांच से परे कोई गहरी समस्या हो सकती है।'

वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने खुलासा किया है कि दिसंबर में कंपनी पर इनकम टैक्स का छापा पड़ा था, जिसके लिए 60 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी जरूरी थी। यह समयसीमा 4 फरवरी तक थी, इसलिए रॉय को समन किया गया था। वह 3 दिन पहले दुबई से लौटे थे। अधिकारी उनके ऑफिस गए, चर्चा की और उनका बयान दर्ज किया, जिसमें वह सहयोग कर रहे थे। फिर उन्होंने 5 मिनट मांगे और अपने चैंबर में चले गए। 20 मिनट बाद पता चला कि उन्होंने खुद को गोली मार ली है। इसके अलावा, मैंने विभाग को निर्देश दिया है कि इस कदम के पीछे के कारणों की जांच करें।

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