जमानत याचिका सलीम मलिक उर्फ मुन्ना ने दायर की है, जो सीएए/एनआरसी विरोधी बैठक के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में से एक है. अदालत ने उसके खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय किए हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इसी तरह के आरोपों में आरोपित अन्य आरोपी को जमानत दे दी थी और इस मामले में उसकी स्थिति भी समान है.
याचिका में कहा गया कि मलिक के खिलाफ जो मामला है, वो उसे केवल चांद बाग विरोध स्थल पर हुई बैठकों से जुड़े एक स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करता है, जो सह-आरोपी सलीम खान के समान है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को जमानत दी थी. कथित आयोजक मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शाहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, अतहर खान, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उनके भाई खालिद थे.
अदालत ने मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की तारीख 8 जनवरी तय की है. मलिक पर आरोप है कि उसने 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक कार शोरूम में आगजनी की थी. यह तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने जमानत आदेश में कहा था कि जिन आरोपियों को जमानत दी गई है, उनका आचरण मुख्य रूप से दूसरों द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए निर्देशों से निर्धारित होता है.
जमानत याचिका में आगे कहा गया कि ये अपील की जाती है कि आवेदक (सलीम मलिक) की स्थिति भी समान है, क्योंकि आवेदक के खिलाफ रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह दर्शाता हो कि आवेदक बड़ी साजिश रचने में शामिल था. न ही ऐसा कोई सबूत है जो यह दर्शाता हो कि आवेदक ने ऐसी स्थिति पैदा कि जिससे तनाव बढ़ाया जा सके.
