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गाजीपुरः कवि सम्मेलन में कवियों ने बिखेरी छटा ! अधिकारी बन बहुत जी लिये, पुत्र रूप धर आओ तो, राह निहारें बूढ़ी खियाॅं, उनसे जरा बतियाओ तो..........


गाजीपुर। ‘हृदयेश पुरस्कार संस्थान’ एवं ‘सृजन-सारथी’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘गृह-गोष्ठी’ कार्यक्रम के अन्तर्गत ‘गाजीपुर के महावीर प्रसाद द्विवेदी’ उपमा से उपमित साहित्यकार श्रीकृष्ण राय हृदयेश के नखास स्थित ‘गौतम आश्रम’ पर सोमवार को ‘सरस काव्य गोष्ठी’ सम्पन्न हुई।

कार्यक्रम का शुभारम्भ कवियों द्वारा माॅं वीणावादिनी के चरणों में दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन और महाकवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी-वंदना से हुआ। कार्यक्रम की आयोजिका व हृदयेश जी की नतिनी विदुषी डॉ. ऋचा राय ने समस्त कवियों एवं श्रोताओं का स्वागत करते ऊहृदयेश जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए हिन्दी साहित्य में उनके महत्तर अवदान को रेखांकित किया।      

काव्यपाठ के क्रम में नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने नववर्ष पर अपना नवगीत “ऑंसू का एक स्वादध्एक रंग रक्त काध्युद्धों ने चेहरा बदरंग कियाध्वक्त काध्गया किन्तु करके भयभीत गयाध्और एक वर्ष आज बीत गया।” सुनाकर  वाहवाही लूटी तो व्यंग्य-कवि अनिल कुमार  ‘अनिलाभ’ ने “जो लोग मेरा रोज हाल पूछ रहे थेध्उनको पता नहीं है क्या? रहता कहाॅं हूॅं मैं।” प्रस्तुत किया। भोजपुरी के श्रेष्ठ गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने अपना गीत “अधिकारी बन बहुत जी लियेध्पुत्र रूप धर आओ तोध्राह निहारें बूढ़ी ॲंखियाॅंध्उनसे जरा बतियाओ तो।” प्रस्तुत कर प्रशंसा अर्जित की। वीररसावतार कवि दिनेशचन्द्र शर्मा ने “जमीं पर चाॅंद सितारों की दुनिया बनाने वालोंध्अंधेरों में भी दिलों से दीपक की लौ जलाना होगा।” प्रस्तुत कर श्रोताओं में ओजत्व का संचार किया। खालिसपुर इण्टर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह ने अपनी कविता “रउरा के पा के आज ई धरती अघा गइलध् रउरे दरस-परस से ई लोगवा धधा गइल। “सुना कर खूब वाहवाही लूटी। वरिष्ठ शायर कलीम अख्तर ने गंगाजमुनी संस्कृति को संबलित करने वाला शेर “नफरतों की ऑंधियाॅं मिटायी जाएध्आओ प्रेम का दिया जलाया जाए।” सुना कर खूब तालियां बटोरी। अन्त में इस काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रबन्ध काव्यों के रचयिता वरिष्ठ कवि कामेश्वर द्विवेदी ने नववर्ष पर अपनी छान्दस कविता “मुस्कान बिखेर चतुर्दिक जो कुसुमित नव पुष्प सुगंधित होध्यह पावन वर्ष नया शुभ हो शुभ कर्म निरन्तर वंदित हो।” प्रस्तुत कर खूब प्रशंसित हुए। 

श्रोता के रूप में हिमांशु राय, अर्जुन सेठ,अंगद शर्मा, संजय वर्मा, श्रवण कुमार जायसवाल, इकरामुद्दीन, याकूब, अदिति राय, प्रबुद्ध, शिल्पी आदि उपस्थित रहे। इस सरस काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता महाकवि कामेश्वर द्विवेदी एवं सफल संचालन सुपरिचित नवगीतकार डॉ.अक्षय पाण्डेय ने किया। आभार ज्ञापन हृदयेश जी की पुत्री गिरिजा राय ने  किया।

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