देवबंद। जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक व जाने माने मशहूर देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि “आज हमारा समाज एक गंभीर नैतिक संकट से गुजर रहा है। अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि हमारी सोच के दो चेहरे बन चुके हैं। मंचों और भाषणों में हम सब दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खलिाफ बोलते हैं, उसे गैर-इस्लामी और जुल्म करार देते हैं, लेकिन जब वही मामला हमारे घरों और रिश्तों तक पहुँचता है, तो हम चुपचाप उसी दहेज को स्वीकार कर लेते हैं। यह दोहरापन सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और फैसलों में साफ नजर आता है।
मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि दहेज जैसी बुराई तब तक खत्म नहीं हो सकती जब तक दहेज लेने से साफ इनकार करने वाले लोग सामने नहीं आएँगे। उन्होंने खास तौर पर लड़के वालों से अपील की कि अगर लड़की वाले किसी दबाव या सामाजिक रस्म के तहत दहेज देने पर जिद भी करें, तो लड़के वालों को साफ शब्दों में कह देना चाहिए कि अगर दहेज के नाम पर एक छोटी-सी चीज भी आई, तो वे शादी नहीं करेंगे।
उन्होंने समाज की इस विडंबना की ओर इशारा किया कि हम दहेज लेने में तो पीछे नहीं रहते, लेकिन जब निकाह के समय मेहर की बात आती है, तो यही कहकर पीछे हट जाते हैं कि लड़के की इतनी हैसियत नहीं कि वह ज्यादा मेहर अदा कर सके। जबकि शरीअत में मेहर औरत का हक है और दहेज की कोई धार्मिक हैसियत नहीं हैकारी इसहाक गोरा ने कहा कि यही दोहरा मापदंड हमारे समाज को अंदर से खोखला कर रहा है। इस्लाम निकाह को आसान बनाने की तालीम देता है, लेकिन हमने उसे इतना मुश्किल बना दिया है कि न जाने कितनी लड़कियाँ सिर्फ इस वजह से बैठी रह जाती हैं कि उनके माता-पिता के पास देने के लिए दहेज नहीं होता।
उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कितने ही माँ-बाप इसी फिक्र और गम में दुनिया से रुख्सत हो गए कि वे अपनी बेटियों को इज्जत के साथ कैसे विदा करें। आखरि में उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हमें सिर्फ नारे लगाने की नहीं, बल्कि अपने अमल को दुरुस्त करने की सख्त जरूरत है। जब तक हम दीन की तालीमात को सही मायनों में समझकर अपनी जिंदगी में लागू नहीं करेंगे, तब तक ऐसी सामाजिक बुराइयाँ यूँ ही हमारी नस्लों को नुकसान पहुँचाती रहेंगी।
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