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ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास हैं राष्ट्रीय ध्वज के रंग, तीन देवियों से भी जुड़ा है देश की आन-बान-शान तिरंगा



गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस आज की युवा पीढ़ी के लिए भले ही एक छुट्टी का दिन बनते जा रहे हों, लेकिन हकीकत में ये दिन भारत की आत्मा, आत्मविश्वास और संप्रभुता के प्रतीक हैं। इन सबका केंद्र बिंदु है हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा। यह सिर्फ तीन रंगों और एक अशोक चक्र का संयोजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा ज्योतिषीय और आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज का हर रंग और अशोक चक्र ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत मायने रखता है। तिरंगे झंडे के तीनों रग ग्रहों और देवियों से भी जुड़े हैं। आइए यहां इस बारे में विस्तार से जानते हैं

हर देश का राष्ट्रीय ध्वज उसकी पहचान होता है। भारत का तिरंगा देश की वेदांतिक परंपरा, आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को दर्शाता है। इसके रंग केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जीवन के तीन मूल स्तंभ बलिदान, ज्ञान और विका का प्रतिनिधित्व करते हैं।

तिरंगे का सबसे ऊपर का रंग केसरिया त्याग, बलिदान और साहस का प्रतीक है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह रंग मंगल और सूर्य ग्रह से जुड़ा है। मंगल जहां साहस, ऊर्जा और शक्ति का कारक है, वहीं सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि केसरिया रंग देशवासियों में उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और दृढ़ संकल्प भरता है। इस रंग को देखते ही देशप्रेमियों के सीने में देश भक्ति की ज्वाला प्रज्वलित होने लगती है।

केसरिया या पीला रंग उत्साह, धन, आंतरिक खुशी और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सूर्य का रंग है और खिले हुए फूलों व समृद्ध कृषि का भी संकेत देता है। आध्यात्मिक रूप से यह रंग तीन देवियों में से देवी लक्ष्मी से जुड़ा है, जो समृद्धि और आंतरिक सुख की प्रतीक हैं। यह रंग व्यक्ति को उसकी अंतर्निहित शक्ति और क्षमताओं की याद दिलाता है।

तिरंगे झंडे के बीच में स्थित सफेद रंग शांति, सत्य और पवित्रता का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना गया है। चंद्रमा मन की शांति और भावनात्मक संतुलन दर्शाता है, जबकि शुक्र प्रेम, सौंदर्य और सामंजस्य का कारक है। यह रंग देश की एकता और अहिंसा के सिद्धांत को दर्शाता है।

सफेद रंग ज्ञान की देवी सरस्वती का प्रतिनिधित्व करता है। यह गाय के सफेद रंग और उसके शुद्ध दूध का भी प्रतीक है, जो सत्व गुण को दर्शाता है। सफेद हंस विवेक का प्रतीक है, जिस पर भगवान ब्रह्मा सवार हैं। यह हमें सही और गलत में फर्क करना सिखाता है और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

तिरंगे का निचला रंग हरा समृद्धि, प्रगति और जीवन का प्रतीक है। ज्योतिष अनुसार यह रंग बुध ग्रह से जुड़ा है, जो बुद्धि, संचार और संतुलन का कारक है। हरा रंग सकारात्मक सोच और रचनात्मकता को बढ़ाता है।

सनातन धर्म में प्रकृति को देवी जगदंबा का स्वरूप बताया गया है। हरा रंग प्रकृति की संरक्षण शक्ति से जुड़ा है, जो हरियाली, कृषि और पर्यावरण संरक्षण को दर्शाता है। पौधे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जो जीवन की रक्षा करती है। इस तरह तिरंगे का हरा रंग देश की कृषि परंपरा, प्रकृति और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक बनता है।

सफेद रंग के मध्य स्थित नीला अशोक चक्र कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर गति का प्रतीक है। ज्योतिष में नीला रंग शनि और गुरु ग्रह से जुड़ा है। शनि कर्तव्य और धैर्य सिखाते हैं, जबकि गुरु ज्ञान और आध्यात्मिक विस्तार का प्रतीक हैं। अशोक चक्र हमें धर्म, सत्य और सतत प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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