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दिल्ली ब्लास्ट का जम्मू कश्मीर से कनेक्शन! अब पूरा चिट्ठा खंगाल रही पुलिस


दिल्ली में लाल किले के पास हुए बम धमाके और कश्मीर में एक स्थानीय मस्जिद के इमाम के नेतृत्व वाले जैश आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद जम्मू और कश्मीर पुलिस ने अब घाटी की सभी मस्जिदों के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक बड़ा निगरानी अभियान शुरू किया है. इसमें मस्जिद द्वारा माने जाने वाले इस्लामी संप्रदाय, क्षमता, निर्माण लागत, मासिक बजट और फंडिंग स्रोतों के बारे में जानकारी शामिल है. इकट्ठा किए जा रहे डेटा में इमामों, मुअज्जिनों, प्रबंधन समिति के सदस्यों और चैरिटी विंग्स का बायोमेट्रिक डेटा भी शामिल होगा, साथ ही मस्जिदों के दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए मस्जिदों के पास की ज़मीन और अन्य संपत्तियों का विवरण भी शामिल होगा.

पुलिस इन धार्मिक संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों की विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी भी मांग रही है, जिसमें मोबाइल फोन मॉडल, IMEI नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक और एटीएम कार्ड, राशन कार्ड और क्रेडिट कार्ड का विवरण शामिल है. घाटी के कई हिस्सों में एक चार-पृष्ठ का फॉर्म बांटा गया है, जिसमें एक पृष्ठ मस्जिद से संबंधित जानकारी के लिए और तीन पृष्ठ मस्जिदों का प्रबंधन करने वाले या सेवा करने वाले लोगों के व्यक्तिगत विवरण के लिए है.

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब पुलिस मस्जिदों और उनके सदस्यों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही है, क्योंकि ऐसी जानकारी पहले भी मांगी गई है. पहले पुलिस किरायेदार सत्यापन मॉडल के अनुसार मस्जिदों में काम करने वाले गैर-स्थानीय इमामों और अन्य लोगों के बारे में विवरण इकट्ठा करती थी ताकि अपने संचालन क्षेत्रों में गैर-स्थानीय लोगों पर नज़र रखी जा सके और ये स्थानीय स्तर के अभियान होते थे.

हालांकि, इस बार ऑपरेशन का पैमाना और दायरा बढ़ा दिया गया है, जिसमें मस्जिद के वैचारिक संप्रदाय जैसे बरेलवी, हनफी, देवबंदी या अहले-हदीस की पहचान, भौतिक संरचना, मंजिलों की संख्या, अनुमानित निर्माण लागत और फंडिंग स्रोतों के अलावा मस्जिद प्रबंधन समिति के सदस्यों, इमामों, मुअज्जिनों, खतीबों के पूरे परिवार का विवरण मांगा जा रहा है. स्थानीय मस्जिदों द्वारा चलाए जा रहे चैरिटी गतिविधियों (बैत-उल-माल) की भी जांच की जा रही है और लाभार्थी सदस्यों का विवरण मांगा जा रहा है.

सूची से किसी भी राष्ट्र-विरोधी या आतंकी समर्थक को बाहर निकालने के लिए पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए जन्मतिथि, फोन नंबर, ईमेल पते और शैक्षिक योग्यता जैसी व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा रही है. पुलिस द्वारा जारी किए गए फॉर्म के अनुसार, मस्जिदों से जुड़े सभी लोगों से पासपोर्ट की जानकारी, यात्रा का इतिहास, विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों की जानकारी, वोटर आईडी नंबर, आधार डिटेल्स, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, राशन कार्ड डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी, पैन, साथ ही विदेश में रहने वाले लोगों के एटीएम और क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भी मांगी गई है.

फॉर्म में मासिक आय और खर्च, अनुमानित कीमत के साथ प्रॉपर्टी की ओनरशिप, उग्रवाद या आपराधिक गतिविधियों में पिछली भागीदारी, सोशल मीडिया पर मौजूदगी और इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में भी जानकारी मांगी गई है. इस कवायद से घाटी में कई लोगों में बेचैनी फैल गई है, कुछ लोग इसे न केवल धार्मिक मामलों में दखल बल्कि लोगों की निजी ज़िंदगी में भी दखल बता रहे हैं.

हालांकि पुलिस ने इस सर्वे से न तो इनकार किया है और न ही आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है, लेकिन सूत्रों ने बताया है कि यह कवायद नवंबर महीने से चल रही है और अधिकारियों को भरे हुए फॉर्म जल्द से जल्द इकट्ठा करके जमा करने के लिए कहा गया है.

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