बाराबंकी । विकसित बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत विकास खंड फतेहपुर के ग्राम गोहानी में आयोजित किसान मेला किसानों के लिए आशा, आत्मविश्वास और उन्नत खेती की नई दिशा लेकर आया। इस प्रेरणादायी कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उद्यान अधिकारी प्रज्ञा उपाध्याय ने की। मेला न केवल योजनाओं की जानकारी का मंच बना, बल्कि किसानों के अनुभव, मेहनत और सफलता की जीवंत कहानी भी सामने आई।कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक निमित्त सिंह, जो जनपद के अग्रणी मधुमक्खी पालक उत्पादक हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने आत्मनिर्भरता की राह बनाई। उनके साथ जिले के अन्य प्रगतिशील किसानों ने भी अपने-अपने स्टॉल के माध्यम से सब्जी, फल, औषधीय पौधों और समेकित खेती की जानकारी दी, जिससे किसान एक-दूसरे से सीखते नजर आए।कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रिंकी सिंह व आचित शुक्ला द्वारा और आदित्य शुक्ला ने किसानों को मधुमक्खी पालन, बागवानी उत्पादन, संरक्षित खेती और समय-समय पर बदलती जलवायु में खेती के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि कम लागत और अधिक उत्पादन के लिए वैज्ञानिक सलाह को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही। जब कि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विधान परिषद सदस्य हरगोविंद सिंह व उनके साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य पूजा सिंह और जिला पंचायत सदस्य भी मौजूद रहे। अतिथियों ने किसानों को सम्मानित करते हुए कहा कि अन्नदाता के परिश्रम से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।किसान मेले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। सब्जी उत्पादन के लिए छोटू कुमार वर्मा, मधुमक्खी पालन के लिए चंद्रशेखर वर्मा, मेडिसिनल प्लांट की खेती के लिए दिलीप वर्मा, पौधों की खेती के लिए रिंकू वर्मा, सब्जियों की खेती के लिए मनोज वर्मा, फूलों की खेती के लिए उत्तम वर्मा, ड्रिप इरिगेशन के लिए पिंटू वर्मा तथा शेडनेट से खेती के लिए संजय वर्मा को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर किसानों के चेहरों पर आत्मगौरव और नई उम्मीद की झलक साफ दिखाई दी।
करीब 500 किसानों की सक्रिय सहभागिता से यह किसान मेला अत्यंत सफल और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। गोहानी की धरती पर आयोजित यह मेला किसानों के लिए यह संदेश छोड़ गया कि जब मेहनत को सही मार्गदर्शन और योजनाओं का साथ मिलता है, तो खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि समृद्ध भविष्य का आधार बन जाती है।
