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गंभीर आरोप! जीवित दंपति को सरकारी प्रमाणपत्र में दिखाया मृत


पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक के बाद एक चौंकाने वाले आरोप सामने आ रहे हैं, जहां एक ओर SIR के दौरान बार-बार जीवित लोगों को मृत दिखाए जाने के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर अब खुद तृणमूल के पंचायत प्रमुख पर ही जीवित दंपति को कागजों में मृत दिखाने का सनसनीखेज आरोप लगा है.

उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर में फर्जी वारिस प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप में तृणमूल के पंचायत प्रमुख पर आरोप लगा है. पता चला है कि सरकारी प्रमाणपत्रों में जीवित दंपति को मृत दिखाकर वारिस के रूप में किसी और को दिखाया गया है और यह संपत्ति हथियाने के कारण हुआ है. ऐसा आरोप है कि जमीन हथियाने के उद्देश्य से जीवित दंपति को कागजों में मृत दिखाया गया है.

बुजुर्ग दंपति का आरोप है कि उस वारिस प्रमाणपत्र पर तृणमूल प्रमुख रफ़ीकुल हसन के हस्ताक्षर हैं. आरोप सामने आते ही उत्तर 24 परगना के अशोकनगर में हंगामा मच गया. दूसरी ओर, आरोपी पंचायत प्रमुख ने दावा किया है कि उन्होंने कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके हस्ताक्षर जालसाजी से इस्तेमाल किए गए हैं.

इस बीच मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का बीडीओ कार्यालय में SIR सुनवाई के दौरान तृणमूल विधायक के समर्थकों ने तोड़फोड़ की. विधायक मणिरुल इस्लाम की उपस्थिति में तांडव हुआ. बीडीओ के कमरे की ओर तृणमूल विधायक खुद ही दल बनाकर दौड़े! कमरे में घुसकर जमकर तांडव मचाया गया. धक्का देकर चैंबर का दरवाजा खोला गया.फर्नीचर में तोड़फोड़ की गई.

मुर्शिदाबाद के फरक्का बीडीओ कार्यालय में इस घटना के कारण SIR की सुनवाई अस्थायी रूप से बंद हो गई. कल सुनवाई के दौरान तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ तृणमूल विधायक मणिरुल इस्लाम बीडीओ कार्यालय में मौजूद थे. वे बीडीओ कार्यालय के बाहर नारे लगा रहे थे. प्रदर्शनकारी तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आरोप है कि SIR के नाम पर उत्पीड़न किया जा रहा है.

तोड़फोड़ के समय फरक्का के बीडीओ अपने चैंबर में नहीं थे. हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके चैंबर में तोड़फोड़ की गई है. इस पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. बाद में, फरक्का की घटना में थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई. लेकिन, जहां तांडव की तस्वीरें सामने आई हैं, तृणमूल विधायक और उनके समर्थकों को स्पष्ट रूप से देखा गया है, फिर भी बीडीओ ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, एफआईआर के आधार पर 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि दोनों गिरफ्तार तृणमूल कार्यकर्ता हैं.

सवाल उठ रहा है कि जब तृणमूल विधायक के नेतृत्व में एक समूह ने बीडीओ कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की, तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? पूरी घटना के बाद तृणमूल विधायक ने सफाई दी है.

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