सहारनपुर । वाहन कटाई का काला धंधा फिर से सर उठा रहा है। फाइनेंस कंपनियों की गाड़ियां स्क्रैप यार्डों में खुलेआम काटी जा रही हैं, जिससे नियम-कायदों की धज्जियां उड़ रही हैं और कंपनियों को करोड़ों का चूना लग रहा है। सूत्रों ने बताया कि जिले के विभिन्न स्क्रैप यार्डों में चोरी की या फाइनेंस बकाया वाली कारें, ट्रक और बाइकें धड़ल्ले से लाई जा रही हैं। इन्हें तोड़कर पार्ट्स और इंजन ढोलीखाल, लोहानी सराय तथा शमादार बाजारों की दुकानों पर बेचे जा रहे हैं। फर्जी बिलिंग के जरिए स्क्रैप पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भेजा जा रहा है, जिससे जीएसटी चोरी का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। मजदूरों को इन अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी होती है, लेकिन डर के मारे वे मुंह नहीं खोलते।
सूत्रों ने बताया कि ये यार्ड ज्यादातर उन कबाड़ियों के किराए पर चल रहे हैं, जो पहले चोरी या फाइनेंस गाड़ी कटाई के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस की कई पुरानी कार्रवाइयों के बावजूद यह धंधा नहीं थम रहा। पिछले सालों में पुलिस ने बड़े अभियान चलाए थे, दर्जनों वाहन जब्त किए और संचालकों को गिरफ्तार किया, लेकिन अब फिर यार्ड बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों का संरक्षण इन कारोबारियों को मिल रहा है, जिस कारण पुलिस की सख्ती प्रभावी नहीं हो पाती।
ये स्क्रैप यार्ड अब चोर गिरोहों के ठिकाने बन चुके हैं, जिससे जिले में अपराध बढ़ रहा है। फाइनेंस कंपनियां लगातार शिकायतें दर्ज करा रही हैं, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी है। स्थानीय निवासी सख्त पुलिस एक्शन की मांग कर रहे हैं। सूत्र दावा करते हैं कि जल्द ही एक बड़ा अभियान चल सकता है, जिससे इस अवैध खेल पर लगाम लगेगी।
यदि समय रहते इस धंधे पर रोक नहीं लगी, तो फाइनेंस कंपनियों के साथ ही समाज को भी गहरा नुकसान होगा। पुलिस और प्रशासन को अब और सख्ती बरतनी होगी, ताकि चार दीवारों के अंदर चल रहा यह काला कारोबार थम सके।
