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प्रतापगढः शीतलहर (ठंड)से प्रभावित शाकभाजी व बागवानी फसलों के बचाव हेतु जिला उद्यान अधिकारी की किसानों को सलाह! टमाटर, मिर्च, आलू व आम की फसलों में रोग-कीट नियंत्रण को लेकर उद्यान विभाग की एडवाइजरी जारी


प्रतापगढ़। जिले में जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बुधवार को कृषकों को शाकभाजी एवं औद्यानिक फसलों पर मौसम के प्रभाव से बचाव के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये शाकभाजी की व्यावसायिक खेती के बारे में बताया है कि सब्जियों के खेतों में विशेषतया टमाटर, मिर्च फसल में विषाणु रोग का प्रकोप अधिक हो रहा है। इसका फैलाव सफेद मक्खीध्हापर कीट के द्वारा होता है। इसके फैलाव की रोकथाम हेतु फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस0सी0 अथवा इमिडाक्लोप्रिड (17.8 प्रतिशत) एस0एल0 0.5 मिली0 को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आलू की फसल में झुलसा बीमारी को रोकथाम हेतु मैन्कोंजैबध्प्रोपीनेबध्कार्बेडाजिन युक्त फफूंदनाशी की 2.0-2.5 कि0ग्रा0 मात्रा 1000 ली0 पानी में घोलकर प्रति हेक्टर छिड़काव करें। जिन खेतों में बीमारी का प्रकोप हो चुका है, उनमें किसी भी फफूंदनाशक-साईमोक्सेनिल 8 प्रतिशत ़ मैन्कोंजेब 64 प्रतिशत डब्लूपी का 2-2.5 किग्रा0 1000 लीटर पानी में घोलकर 16-16 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें। गोभीवर्गीय फसलों में डायमंड बैक मौथ का प्रकोप होने पर क्लोरेन्टशनिलिप्रोल 0.5-1 मिली रसायन प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर का छिड़काव करें।’ टमाटर तथा मिर्च की फसल को झुलसा रोग से बचाव हेतु 0.2 प्रतिशत (2 ग्रामध्ली0) की दर से मैन्कोजेब का छिड़काव करें। फसल को रस चूसक कीटों से बचाव हेतु नीम सीड कर्नल स्ट्रैक्ट 3-5 ग्राम या फिप्रोनिल (5 प्रतिशत) एस0सी0, 0.5-0.75 मिली रसायन प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

उन्होने फल बागवानी के सम्बन्ध में बताया है कि आम के बागों की जुताई करें ताकि मिज कीट, फल मक्खी, गुजिया कीट एवं जाला कीट की वे अवस्थायें जो जमीन में दूसरे वर्ष आने तक पड़ी रहती है, नष्ट हो जाये।  दिसम्बर से जनवरी माह में पुरानी अनुत्पादक बागों का जीर्णोद्वार अन्तर्गत घनी शाखाओं का कटाई-छटाई का कार्य करें तथा कटे भाग पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का लेप लगाये। आमध्लीची में मिलीबग (गुजिया) कीट को पेड़ों पर चढ़ने से रोकने के लिए पेड़ के तनों पर चारो ओर 400 गेज की मोटी सफेद पॉलीथीन की 25 सेन्टीमीटर की चैड़ी पट्टी लपेटकर भूमि से लगभग 40 सेन्टीमीटर ऊपर मिट्टी की पतली परत चढ़ा दें तथा नियन्त्रण हेतु 2 प्रतिशत लैम्बडा साइहैलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्लू० पी० 100 ग्रा0 प्रति पेड़ तने के चारो ओर बुरकाव करें। आम में यदि शाखाओं में डाइबैंक रोगध्गोंद निकलने की समस्या हो तो पौधों की जड़ों के पास 200-400 ग्रा० कॉपर सल्फेट प्रति वृक्ष की दर से प्रयोग करें तथा थायोफिनट मिथाइल 01 मिली रसायन प्रति लीटर पानी में घोलकर पर्णीय छिड़काव करें। अमरूद की छाल खाने वाली इल्ली की रोकथाम के लिए सबसे पहले पतले तार या साइकिल की तीली से सुराखों की सफाई करें, नियन्त्रण हेतु क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एस०सी० 1 मिली० प्रति ली० में घोल कर छिड़काव करें।

उन्होने फूलों की व्यावसायिक खेती के सम्बन्ध में बताया है कि गुलाब में बडिंग का कार्य, सिंचाई, निराई, सफाई करें एवं पत्तियों में ब्लैक लीफ स्पॉट रोग जिसमें पत्तियां झुलसी हुई प्रतीत हो कार्बेडाजिम 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 8-10 दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करें। ग्लैडियोलस में सिंचाई, निराई गुड़ाई करें तथा मुरझाई हुई टहनियों को निकालते रहे एवं फूल खिलने के बाद डंठलों की कटाई-छटाई करें। रोजरी में लगे गुलाब को पौधों की कटिंग उपरान्त विंटरिंग के लिए खोदे गये गड्ढ़ो की मिट्टी में कम्पोस्ट, उर्वरक, नीम खली, बोनमील का मिश्रण निर्धारित अनुपात में मिलाकर भराई करें।

एकीकृत कीट प्रबन्धन के लिए रबी मौसम की समस्त शाकभाजी फसलों में नीम सीड कर्नल एक्सटैक्ट (एनएसकेई) 5 मिली0 प्रति 10 लीटर हल्के गरम पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसका छिड़काव 10-15 दिनों के अन्तराल पर करना चाहिए।

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