आगरा। ताजमहल के निकट माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की कथित अवहेलना कर किए गए अवैध निर्माणों को लेकर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। प्रार्थना पत्र में ताजमहल की परिधीय सीमा से 500 मीटर के भीतर बने अवैध मकानों और दुकानों को ध्वस्त करने की मांग की गई है।
प्रार्थी ने स्वयं को वरिष्ठ नागरिक एवं समाजसेवी बताते हुए कहा है कि उन्होंने जनहित में अब तक एक दर्जन से अधिक जनहित याचिकाएं माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल की हैं, जिन पर आदेश पारित होने से आम जनता को लाभ मिला है। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर ताजमहल के संरक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुपालन में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शासनादेश भी लागू हैं।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, ताजमहल के 500 मीटर के भीतर नो-कंस्ट्रक्शनध्नो-मिक्स जोन लागू है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा व्यवसायिक गतिविधि प्रतिबंधित है। इस क्षेत्र में आगरा विकास प्राधिकरण अथवा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भी निर्माण की अनुमति नहीं दे सकता। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताजमहल के 5 किलोमीटर के दायरे में पेड़ों की कटाई एवं पर्यावरण में बदलाव पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिसके लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि ताजमहल की दीवार से कुछ ही दूरी पर सुप्रीम कोर्ट के मानकों के विपरीत दो दर्जन से अधिक दो मंजिला मकानों का निर्माण कर लिया गया है। उदाहरण स्वरूप ताजगंज क्षेत्र की असद गली में बिना किसी वैधानिक अनुमति के दो मंजिला मकान निर्माण का उल्लेख किया गया है, जिसे पूर्णतः अवैध बताया गया है।
प्रार्थी ने मांग की है कि ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में बने सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए और नियमों को समान रूप से सभी पर लागू कराया जाए, ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों एवं शासनादेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके। नया निर्माण नहीं,वह करीब 15 से 20 साल पहले का बना हुआ मकान है स्थित जर्जर जैसी है इसलिए कार्यवाही करना उचित नहीं
वही शिकायत कर्ता रवि गाँधी ने बताया की मकान भले ही 15साल पहले भी बना हुआ था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी इस मकान बनने से पहले के है वावजूद निर्माण कैसे हुआ विभागीय जिम्मेदार कार्यवाही करने से बच रहे है इन मकानों पर कार्यवाही नहीं हुई तो हाकोर्ट जाकर लापरवाह कर्मचारी अधिकारी पर कार्यवाही की मांग करूंगा।
