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तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने 2.15 करोड़ परिवारों को पहुंचाया पोंगल गिफ्ट


तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने इस साल पोंगल पर्व पर 97 प्रतिशत योग्य परिवारों तक 'पोंगल गिफ्ट' पहुंचाया है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कुल 2.22 करोड़ योग्य परिवारों में से 2.15 करोड़ राशन कार्डधारकों को सरकार की योजना का लाभ मिला है.

सहकारिता मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन ने रविवार (18 जनवरी) को एक बयान में कहा कि 'पोंगल गिफ्ट हैम्पर योजना' के तहत नकद वितरण के लिए रखे गए 6687.51 करोड़ रुपए में से अब तक 6453.54 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं. योजना के क्रियान्वयन की तारीफ करते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी का वितरण अधिकारियों की योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों के कारण संभव हुआ.

8 जनवरी को शुरू की गई 'पोंगल उपहार योजना' के तहत 3000 रुपए नकद के साथ एक किलो कच्चा चावल, चीनी और एक गन्ना दिया जाता है. यह लाभ सभी राशन कार्डधारकों को दिया जाता है, जिसमें श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास शिविरों में रहने वाले परिवार भी शामिल हैं.

सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक हफ्ते में राशन की दुकानों पर 6500 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद का लेन-देन किया गया. जिला कलेक्टरों और जॉइंट रजिस्ट्रारों की देखरेख में सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंकों से लोकल सोसाइटियों को फंड ट्रांसफर किया गया और हथियारबंद पुलिस सुरक्षा के साथ फेयर प्राइस दुकानों तक पहुंचाया गया.

हर राशन की दुकान आमतौर पर 900-1100 कार्डधारकों को सेवा देती है, जिसमें हर दुकान पर 27-32 लाख रुपए का लेन-देन होता है और रोजाना 6-7 लाख रुपए का काम होता है. हालांकि राज्य भर में लगभग 7.6 लाख कार्डधारकों को अभी 'पोंगल पैकेज' नहीं मिला है. इसका मुख्य कारण त्योहार के दौरान लाभार्थियों का अपने घरों से बाहर यात्रा करना है.

जिला-वार आंकड़ों में भी भिन्नताएं देखी गई हैं. दक्षिण चेन्नई में सबसे ज्यादा लंबित लाभार्थी दर्ज किए गए, जहां 10.59 लाख योग्य कार्डधारकों में से लगभग 59,000 को अभी भी उपहार नहीं मिला है. अन्य जिलों में जहां बड़ी संख्या में लाभार्थी अभी भी इंतजार कर रहे हैं, उनमें मदुरै (44,000), तिरुनेलवेली (32,000), और थेनी (22,000) शामिल हैं.

इसके विपरीत, धर्मपुरी, तिरुपत्तूर, अरियालुर, पेरम्बलूर और पुदुक्कोट्टई जैसे जिलों ने लगभग 98 प्रतिशत वितरण हासिल किया है, जहां प्रत्येक जिले में 10 हजार से भी कम कार्डधारक अभी योजना का लाभ लेने का इंतजार कर रहे हैं.

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