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इंदौर में जहां दूषित पानी से हुई 16 मौतें, वहां के पार्षद को मिला था 'बेस्ट' का अवॉर्ड


मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 16 लोगों की मौत के मामले पर नई परतें खुलने लगी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस बीजेपी पार्षद कमल वाघेला पर दूषित पानी की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है, उसी को इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कुछ महीने पहले सार्वजनिक मंच से 'बेस्ट पार्षद' का अवॉर्ड दिया था। अब वह पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जो मेयर के दावों की पोल खोल रहा है। वीडियो में मेयर पार्षद की तारीफों के पुल बांध रहे हैं और दूसरे पार्षदों को उनसे सीखने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन हकीकत में ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन का काम अधूरा होने की वजह से लोग जहरीला पानी पीने पर मजबूर हुए और मौतें हुईं।

वायरल हो रहा वीडियो नगर निगम परिषद के सदस्यों के 3 साल पूरे होने पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम का है। इसमें मेयर पुष्यमित्र भार्गव मंच से बोल रहे हैं, जबकि उनके पीछे पार्षद कमल वाघेला खड़े हैं। पार्षद की तारीफ करते हुए मेयर कहते हैं, 'यह हैं कमल वाघेला। इनके नाम में कमल भी है, मतलब कोमल हैं और वाघ भी है, मतलब ज्यादा कोई परेशान करता है तो शेर हो जाते हैं। जो परेशान करने वाले हैं, वे जरा ठीक से समझ लें कि ज्यादा परेशान करेंगे तो ठीक कर देंगे। कमल जी संगठन के आदमी हैं, महामंत्री रहे हैं। 24 सड़कें उन्होंने बना दी हैं इस वार्ड में। इन 24 सड़कों में पहले ड्रेनेज की लाइन डाली, फिर पानी की लाइन डाली।'

इंदौर के मेयर ने वीडियो में पार्षद की तारीफ करते हुए आगे कहा, 'एक सड़क को बनाने का खर्चा कम से कम 10 लाख, तो 2 करोड़ 40 लाख की तो सड़कें हो गईं। इतने की ही पानी की और ड्रेनेज की लाइन डली है। तो एक पार्षद ने अपने 3 साल के कार्यकाल में 10 करोड़ के काम करवा दिए। अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट मैं मेयर होने के नाते उनको देता हूं और बधाई देता हूं। बाकी सब पार्षदों से भी कहूंगा, जिनके क्षेत्र में बस्तियां आती हैं, उनको भागीरथपुरा आकर देखना चाहिए कि कैसे काम हुआ। यह हमेशा अपने काम के लिए मुझे फॉलो करते रहते हैं, परेशान करते रहते हैं, चिंतित करते रहते हैं, लेकिन मैंने आजतक इनका कोई काम नहीं रोका।

वीडियो में मेयर क्षेत्र की जनता को बता रहे हैं कि भागीरथपुरा में 2 करोड़ 40 लाख की 24 सड़कों के अलावा इतने ही पैसों के ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन डल चुकी है। लेकिन 16 लोगों की मौत के बाद हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। इंडिया टीवी से बातचीत में पार्षद कमल वाघेला ने खुद कहा था, 'शुरू से सिस्टम कोलैप्स था, सिस्टम में कमी थी। ड्रेनेज का पानी पाइपलाइन में, पाइपलाइन का पानी ड्रेनेज में मिल रहा था।' सवाल उठता है कि अगर 2.40 करोड़ की ड्रेनेज और 2.40 करोड़ की पाइपलाइन डल चुकी थी, तो फिर लोगों ने क्यों और कैसे जहर वाला पानी पिया? कागजों में करोड़ों खर्च दिखाए गए, लेकिन हकीकत में लीकेज और लाशें ही नजर आईं।

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