छिबरामऊ/कन्नौज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए याची अमिता त्रिपाठी उर्फ नेहा त्रिपाठी की रिट याचिका को मंजूरी दी।
न्यायालय ने 30 मई और 22 जून 2024 के आदेश रद्द कर दिए, जिनके तहत याची के खिलाफ चैथी बार नई जांच शुरू की गई थी।न्यायालय ने पाया कि अधिकारियों ने 8 अगस्त 2024 को जारी अंतरिम संरक्षण आदेश की अवहेलना करते हुए 13 सितंबर 2024 को जांच आगे बढ़ा दी। अदालत ने इसे निन्दनीय आचरण बताया और कहा कि अधिकारी ने स्वयं को कानून से ऊपर समझा।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नई शिकायतें मूलतः पूर्व जांचों से अलग नहीं थीं। कार्रवाई व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों पर आधारित थी।23 नवंबर 2024 के आदेश में न्यायालय ने विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए। 13 अक्टूबर 2025 को राज्य ने सूचित किया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई बंद कर दी गई क्योंकि अधिकारी ने अपना आदेश वापस ले लिया था। न्यायालय ने कहा कि अधिकारी ने अंतरिम आदेश से अवगत होते हुए भी चैथी जांच का आदेश दे दिया, जो अवैध और असंगत था।अंततः न्यायालय ने सभी आदेशों को निरस्त कर दिया और याची को बार-बार परेशान करने के कारण 50,000 रुपये की लागत देने का आदेश दिया, जिसे राज्य अधिकारी से वसूल सकता है।
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