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रूद्रपुरः प्रीत विहार के अवैध कालोनाइजरों को किसका संरक्षण ?! सीलिंग की भूमि पर काटी गयी हैं कालोनियां, प्राधिकरण कर रहा नजरअंदाज


रुद्रपुर। जिलेभर में सीलिंग की भूमि और बिना नक्शा पास करवाए काटी गई अवैध कालोनियों पर जिला विकास प्राधिकरण की लगातार सख्ती के बीच जिला मुख्यालय पर स्थित प्रीत विहार में प्राधिकरण का दोहरा मापदंड खुलकर सामने आ गया है। यहां सीलिंग की भूमि पर खुलेआम प्लॉटिंग हो रही है, लेकिन प्राधिकरण इसे अनदेखा कर रहा है। इस चुप्पी ने लोगों में सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर प्रीत विहार के कालोनाइजरों को किसका संरक्षण प्राप्त है।

पिछले कुछ समय में जिला विकास प्राधिकरण ने पूरे जिले में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 500 से अधिक अवैध कालोनियों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। इन कालोनियों में पहले से बेचे गए प्लॉटों की रजिस्ट्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे हजारों खरीदार परेशान होकर रोजाना रजिस्ट्रार कार्यालय और उच्चाधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। प्राधिकरण की इस कार्रवाई ने कई लोगों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।

हाल ही में गूलरभोज में सरकारी भूमि पर अवैध प्लॉटिंग के मामले में प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाते हुए वहां कब्जा जमाए लोगों को बेदखली के नोटिस जारी किए और जमीन बेचने वाले भूमाफिया पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा। इस कार्रवाई से यह संदेश गया था कि प्राधिकरण अवैध कालोनियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

लेकिन जिला मुख्यालय पर स्थित प्रीत विहार में स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। यहां सीलिंग की पर्याप्त भूमि होने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से कालोनियाँ काटी गई हैं, परंतु प्राधिकरण द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब पूरे जिले में सख्ती है तो फिर प्रीत विहार में यह मेहरबानी क्यों? क्या यहां के कालोनाइजरों को कोई विशेष संरक्षण प्राप्त है?

लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय पर प्राधिकरण की नाक के नीचे हो रहे इस अवैध विकास को रोकने में उदासीनता न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह उन हजारों लोगों के साथ भी अन्याय है जिन्हें दूसरे इलाकों में प्लॉट लेने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। प्रीत विहार में अवैध प्लॉटिंग और प्राधिकरण की चुप्पी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जिले में अवैध कालोनियों पर कार्रवाई एकरूपता से नहीं हो रही।।

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