बीसलपुर। राजनीति में न कोई शॉर्टकट होता है और न ही कोई स्थायी मुकामकृइसी सोच के साथ डॉ. रत्नेश गंगवार ने संघर्ष, धैर्य और निरंतर जनसेवा के बल पर अपनी एक सशक्त राजनीतिक पहचान गढ़नी शुरू कर दी है।वर्ष 2004 में बरेली कॉलेज से छात्रसंघ महामंत्री के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले डॉ. रत्नेश गंगवार ने संगठनात्मक मजबूती के साथ जनसंपर्क को अपनी राजनीति की रीढ़ बनाया। कॉलेज राजनीति से निकलकर जन-राजनीति में प्रवेश करते ही चुनौतियां बढ़ींकृजनता की अपेक्षाएं, संगठन की जिम्मेदारियां और स्वयं को साबित करने की जंग।वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ रहा। समाजवादी पार्टी से बीसलपुर विधानसभा का प्रत्याशी घोषित होने के बावजूद गठबंधन के चलते टिकट कट गया। यह झटका उनके आत्मबल की परीक्षा था, लेकिन उन्होंने हार से सीख लेकर राजनीति को लंबी दौड़ मानते हुए लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।बाद में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने बूथ स्तर से लेकर मतदाता संपर्क और पंचायत चुनावों तक सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ और विश्वसनीयता और मजबूत हुई। वर्ष 2022 में टिकट न मिलने को उन्होंने असफलता नहीं, बल्कि तैयारी का अवसर माना।डॉ. रत्नेश गंगवार की राजनीति सेवा, संवाद और जनसंपर्क पर आधारित है। 2027 को लक्ष्य बनाकर वे लगातार जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं और स्थानीय समस्याओं के समाधान के प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि राजनीति सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए होनी चाहिए।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। बाला देवी रोशन लाल डिग्री कॉलेज की स्थापना, फार्मेसी कॉलेज की शुरुआत और लॉ कॉलेज की योजना उनके सामाजिक सरोकारों को दर्शाती है।
हालांकि परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही हैकृपिता डॉ. तौले राम गंगवार जिला पंचायत सदस्य, मां तारावती गंगवार ब्लॉक प्रमुख और पत्नी प्रियंका गंगवार वर्तमान में जिला पंचायत सदस्यकृलेकिन वे इसे विरासत नहीं मानते। उनका कहना है कि पहचान नाम से नहीं, जमीन पर किए गए कार्यों से बनती है।बीसलपुर उनकी कर्मभूमि है और पीलीभीत सदर क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता ने उन्हें लोकप्रिय चेहरा बना दिया है। जनसेवा और संगठन के सहारे डॉ. रत्नेश गंगवार 2027 को अपनी नई उड़ान का वर्ष मानते हैं, जहां निष्ठा, धैर्य और जनता का विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत होगा।
