प्रतापगढ़। जिले में मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 ए0एन0 प्रसाद ने शुक्रवार को हाइपोथर्मिया हेतु जनसमुदाय के लिये एडवाइजरी जारी करते हुये बताया है कि यह बहुत ठण्डे तापमान में लम्बे समय तक रहने के कारण होता है जहाँ शरीर की गर्मी उसके उत्पादन की तुलना में तेजी से कम होने लगती है। अन्ततः शरीर स्वयं को गर्मी प्रदान करने के लिये अपनी संग्रहित ऊर्जा का उपयोग करता है जिससे शरीर का तापमान और कम होता चला जाता है। हाइपोथर्मिया एक चिकित्सीय आपात स्थिति है जिसमें शरीर का आन्तरिक तापमान 95 डिग्री फारेनहाइट (35 सेन्टीग्रेड) से नीचे चला जाता है। शरीर का बहुत कम तापमान मस्तष्कि को प्रभावित करता है जिससे व्यक्ति स्पष्ट रूप से सोचने या कोई अन्य गतिविधि करने में असमर्थ हो जाता है। यह हाइपोथर्मिया को विशेष रूप से जानलेवा बनाता है।
हाइपोथर्मिया होने की सबसे अधिक प्रवृत्ति वृद्ध व व्यस्क जिनके पास अप्रर्याप्त भोजन कपडे या गर्मी प्रदान करने वाले साधन न हो, ठण्डे शयन कक्ष में सोने वाले बच्चे, लम्बे समय तक बाहर रहने वाले लोग जैसे बेघर, पैदल यात्री, शिकारी आदि, शराब व अवैध दवाओ का सेवन करने वाले व्यक्ति, शिशु में होती है। हाइपोथर्मिया के लक्षण के सम्बन्ध में बताया है कि इससे ठण्ड से कॉपना, थकान बहुत अधिक महसूस होना, भ्रम की स्थिति होना, स्मरण शक्ति की कमी, अस्पष्ट उच्चारण करना, सुस्ती व अधिक नीद आना, शिशु में चमकदार लाल व ठण्डी त्वचा तथा ऊर्जा की कमी होती है।
हाइपोथर्मियों के बचाव के सम्बन्ध में बताया है कि अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें, व्यक्ति को गर्म कमरे या आश्रय में ले जायें और कपडे बदले, गीले कपडे तुरन्त हटा दें। व्यक्ति के शरीर को त्वचा से त्वचा के सम्पर्क, कम्बल, कपडे तौलये या सूखी परतो से गर्म करें। शरीर का तापमान बढ़ाने के लिये गर्म पेय दे। शरीर का तापमान बढ़ने के बाद व्यक्ति को सूखा रखे और उसके सिर व गर्दन सहित शरीर को गर्म कम्बल में लपेट दे। जितनी जल्दी हो सके व्यक्ति को उचित चिकित्सा सहायता दिलायें। गम्भीर हाइपो थर्मिया से पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो सकता है और उसकी नाड़ी चल ही नहीं सकती या साँस लेने की अवस्था में नही हो सकता है। उस स्थिति में व्यक्ति को सावधानीपूर्वक सम्भॉले और तुरन्त आपातकालीन सहायता प्राप्त करायें। हाइपोथर्मिया के मरीज को चिकित्सालय तक भेजने हेतु 108 एम्बुलेन्स का उपयोग करें।
उन्होने क्या न करें के सम्बन्ध में बताया है कि गीले कपडे़ पहनने से बचें, मादक पेय न दे तथा किसी बेहोश व्यक्ति को पेय पदार्थ न दे, बरसात में भीगने से बचें, अनावश्क शीत लहर के समय बाहर न निकले, अँगीठी जलाकर बन्द कमरे में न रखे, ठण्डे पेय पदार्थों का इस्तेमाल न करें, ठण्डे पानी से स्नान न करें।
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