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पीलीभीतः कड़ाके की ठंड से पशु-पक्षियों पर संकट, पशुपालन विभाग ने किसानों के लिए जारी की विस्तृत एडवाइजरी


पीलीभीत। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के चलते जहां आम जनजीवन प्रभावित है, वहीं पशु-पक्षियों के सामने भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसी को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों और किसानों के लिए सतर्कता बरतने संबंधी विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार त्यागी ने बताया कि ठंड के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।डॉ. त्यागी ने स्पष्ट किया कि पशु-पक्षियों को खुले आसमान के नीचे कतई न बांधा जाए। उन्हें घिरे हुए, छप्पर या शेड से ढके स्थानों में रखें। पशुशालाओं में रोशनदान, दरवाजे और खिड़कियों को आवश्यकतानुसार टाट या बोरे से ढकें, ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर न आए। साथ ही पशु बाड़े में गोबर और मूत्र निकास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। जलभराव या मूत्र जमा होने से जहरीली गैस बनने का खतरा रहता है, जिससे पशुओं को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।उन्होंने बताया कि बिछावन में भूसा, पराली, गन्ने की खोई आदि का उपयोग करें और बाड़े की नमी व सीलन से पशु-पक्षियों को बचाएं। पशुओं को नियमित रूप से ताजा और स्वच्छ पानी पिलाएं। ठंड से बचाव के लिए पशुओं को जूट के बोरे का झूल पहनाएं, लेकिन यह ध्यान रखें कि झूल सही तरह से बंधा हो और खिसके नहीं।आवश्यकतानुसार अलाव जलाने की सलाह देते हुए उन्होंने चेताया कि अलाव पशुओं की पहुंच से दूर रखा जाए। इसके लिए पशु के गले में रस्सी इस प्रकार बांधी जाए कि वह अलाव के पास न पहुंच सके। बाड़े में अलाव जलाते समय गैस निकास के लिए रोशनदान अवश्य खुला रखें।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि ठंड के मौसम में पशुओं को संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है। आहार में खली, दाना और चोकर की मात्रा बढ़ा दें। दूध दुहने के बाद पशु को कुछ समय के लिए खुले स्थान पर धूप में खड़ा करें। नवजात पशु-बच्चों को खीस (कोलस्ट्रम) अवश्य पिलाएं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। प्रसव के बाद मां को ठंडा पानी न देकर गुनगुना पानी मिलाकर पिलाने की सलाह दी गई है।उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में भेड़-बकरियों में पीपीआर बीमारी फैलने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इससे बचाव के लिए टीकाकरण अवश्य कराएं। गर्भित पशुओं का विशेष ध्यान रखें और प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा को शीतलहर से सुरक्षित रखें।यदि किसी पशु में ठंड के कारण कपकपी, बुखार या असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत निकटतम पशु चिकित्सक से संपर्क करें और उनके परामर्श का पूर्ण रूप से पालन करें। आपदा के कारण पशु की मृत्यु होने पर राहत राशि प्राप्त करने के लिए राजस्व विभाग से संपर्क स्थापित करने की भी अपील की गई है।

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