धर्मराज रावत
तिलोई/अमेठी। शर्राफा व्यवसायी के साथ हुई लूट का 48 घंटे बाद भी पुलिस कोई ठोस सुराग नहीं तलाश पाई है।गौरतलब हो कि मंगलवार की सुबह करीब 9रू30 बजे दिनदहाड़े मोहनगंज थाने से महज दो किलोमीटर दूर पीढ़ी मार्ग पर धर्मेधाम मोड़ शुक्ल चेक के पास बाइक सवार बेखौफ दो नकाबपोश बदमाशों ने शर्राफा व्यवसायी बारकोट निवासी घनश्याम सोनी से तमंचे की नोंक पर पांच हजार की नकदी,करीब डेढ़ लाख कीमत के ऊपर सोने चांदी के आभूषण से भरे बैग को लूटकर फरार हो गए।गौरतलब हो कि बैग में व्यवसाई की तिजोरी की चाभी और एक मोबाइल फोन भी था।सूत्रों की मानें तो जेवरात से भरे बैग में व्यवसाई के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस घटनास्थल से लेकर रमई,लालगंज,बधौना माइनर,और विराज तक खाक छानी लेकिन लुटेरों को दिन के उजाले में भी पुलिस पकड़ नहीं पाई।हालांकि विराज अंतर्गत मोबाइल स्विच ऑफ होने के कारण पुलिस के भी हाथ पैर और दिमाग स्विचऑफ हो गए।
खुलासा करने के बजाय पुलिस द्वारा लीपापोती की गई हाल ही कुछ चर्चित घटनाएं--
- 10 सितंबर की रात्रि खानापुर चपरा निवासी किसान सुल्तान पुत्र रियाज के घर नगदी समेत सोने चांदी के जेवरात कुल 8 लाख से ऊपर की चोरी।
- 20 सितंबर को घर बाहर वाकिंग को निकली भदमर गांव निवासिनी शिक्षिका सरोजनी सिंह पत्नी नरेंद्र बहादुर सिंह से बाइक सवार बदमाशों द्वारा चाकू की नोक पर 12 ग्राम सोने की चैन की लूट।
- देशी ठेका और वियर की दुकान शाहमऊ में चोरी।
- पुष्कर त्रिपाठी जन सेवा केन्द्र शाहमऊ में चोरी।
- सुमित सेठ किराना स्टोर शाहमऊ में चोरी।
- सोनू होटल शाहमऊ में चोरी।
- शुक्ला मेडिकल स्टोर शाहमऊ में चोरी।
- सुपर बुक डिपो(कॉपी किताब की दुकान)शाहमऊ में चोरी।
- अगरी चैराहे पर स्थित एक किराना स्टोर में हजारों की चोरी।
सवालों के घेरे में इंस्पेक्टर की कार्यशैली
क्षेत्र के सत्ताधारियों के सागिर्द दलालों, खनन माफियाओं, मादक पदार्थ विक्रेताओं एवं नशा कारोबारियों में तथाकथित ईमानदार के रूम शुमार कोतवाल राकेश सिंह की निष्पक्ष कार्यशैली पर क्षेत्र की दर्जनों संगीन घटनाएं सवाल खड़ा कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में घटित हर एक घटना में राकेश सिंह ने संदिग्धों को उठाया और खुलासे के बजाय उनसे वसूली कर उल्टे पीड़ितों को ही पुलिसिया रौब दिखाकर घटना को फर्जी साबित करने का काम किया है।महोदय के इस कार्य में इनके चार कारखास वसूली करने वाले दीवान और सिपाहियों का अहम रोल है।अब देखना है कि शर्राफा व्यवसायी लूटकांड का महोदय निष्पक्ष खुलासा करते हैं कि पूर्व के मामलों की तरह पुलिसिया कहानी गढ़कर लूट के शिकार पीड़ित को विश्वास में लेकर अपनी मीठी-मीठी बातों में उलझाकर कानूनी पचड़े का हवाला दे घटना को फर्जी साबित करते हैं।महोदय को वैसे भी फर्जी मुकदमा लिखने और अपराधों की लीपापोती करने में महारत हासिल हैं।शुक्र है बिरादरी के सत्ताधारियों की सुबह शाम चाटुकारिता का वरना संभव ही नहीं था कि इतनी घटनाएं होने के बाद भी महोदय कुर्सी पर बने रहते। इसका बड़ा उदाहरण है हाल ही के महज एक मामले को लेकर फुरसतगंज थानेदार का।
