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थर-थर कांपेगा पाकिस्तान! भारत को कब डिलीवर होंगे 3 अपाचे हेलिकॉप्टर? सामने आ गई तारीख


सेना की हवाई ताकत में इजाफा होने जा रहा है. अमेरिका जल्दी ही भारत को तीन AH-64E अपाचे हेलिकॉप्टर डिलीवर करेगा. यह अपाचे बेड़े का आखिरी बैच होगा. इसी के साथ जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन की 6 यूनिट का बेड़ा पूरा हो जाएगा. इन हेलिकॉप्टर की तैनाती फरवरी 2020 में शुरू हुई थी. इसके पीछे मकसद पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना है. इसी साल जुलाई में तीन अपाचे की डिलीवरी गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर हुई थी. इन्हें सोवियत यूनियन के एंटोनोव कार्गो विमान से लाया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, अपाचे हेलिकॉप्टर इसी महीने भारत को डिलीवर होंगे और उन्हें सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा. अपनी मारक क्षमताओं की वजह से फ्लाइंग टैंक के नाम से पहचाने जाने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर दुनियाभर में अपनी एडवांस्ड मल्टी रोल कॉम्बेट क्षमता की वजह से सबसे खास माना जाता है. यह अमेरिका के मेसा एरिजोना में तैयार किया गया है. अमेरिकी सेना के अटैक बेड़े का अहम हिस्सा है. भारत समेत कई सहयोगी दल इसका इस्तेमाल करते हैं. ऐसा दावा किया जाता है कि अपाचे हेलिकॉप्टर से मारक क्षमता में इजाफा तो होता है, साथ ही हवाई युद्धों में सही तरह से कंट्रोल हासिल करता है.

इस हेलिकॉप्टर में 26 एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल हैं. इसमें बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी, जॉइंट टैक्टिकल इन्फॉर्मेशन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, अधिक शक्तिशाली T700-GE-701D इंजन, बेहतर रोटर ब्लेड और रियल टाइम में मानवरहित हवाई वाहनों को नियंत्रित करने की क्षमता शामिल है. अबतक AH-64E की सीरीज के 400 हेलिकॉप्टर डिलीवर किए जा चुके हैं. अबतक अमेरिकी सेना में शामिल हेलिकॉप्टर बेड़े ने 4.5 मिलियन से अधिक घंटों की उड़ान भरी है.

भारतीय वायुसेना अभी 22 अपाचे का संचालन करती है. इनके जरिए हवाई रक्षा और डीप स्ट्राइक मिशन को पूरा किया जाता है. इधर भारतीय सेना इस बेड़े का उपयोग हवाई सहायता, टैंक बस्टिंग और बख्तरबंद लड़ाई के दौरान करेगी. लेकिन फिर से उस बहस को हवा मिल गई है, जिसमें अटैक हेलिकॉप्टर के कंट्रोल को लेकर वायुसेना और सेना की भूमिका तय की जाती है.

अपाचे के अलावा रक्षमंत्रालय ने मार्च में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 156 प्रचंड हेलिकॉप्टर के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. इनकी डिलीवरी अगले पांच साल में की जाएगी. प्रचंड को चीन से लगी हिमालयी सीमाओं के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें स्टील्थ क्षमताएं, कवच और एडवांस्ड नाइट अटैक सिस्टम है.

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