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कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद में एक हिंदू पक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दूसरा! जानें पूरा मामला


मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट एक हिंदू पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसने दूसरे हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यह याचिका दाखिल की गई है. सोमवार (24 नवंबर, 2025) को कोर्ट ने कहा कि वह 1 दिसंबर को इस याचिका पर सुनवाई करेगा.

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में विवादित स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने का अनुरोध करते हुए अलग मुकदमा दायर करने वाले एक अन्य हिंदू पक्ष को सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी थी. पीड़ित हिंदू पक्ष के एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दूसरे पक्ष को सभी श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि मानने में त्रुटि हुई.

उन्होंने कहा कि वह (उनके मुवक्किल) मुकदमा दायर करने वाले पहले व्यक्ति थे और हाईकोर्ट का इस तरह के विवाद से जुड़े दीवानी मुकदमों में से एक में दूसरे पक्ष को आगे बढ़ाना अनुचित था. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया है, जबकि उस पक्ष के आवेदन में ऐसी कोई मांग नहीं की गई थी.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में कुल 18 केस हैं, जिन्हें हाईकोर्ट ने अपने पास ट्रांसफर कर लिया है. इनमें से 15 को एक साथ कर दिया गया और बाकी को अलग से लिस्ट किया गया है. हाईकोर्ट ने जुलाई में केस नंबर 17 के वादियों को सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी थी. केस नंबर 17 भगवान श्रीकृष्ण विराजमान के नाम पर नेक्स्ट फ्रेंड के जरिए दायर किया गया. इस केस के दूसरे वादी सुरेंद्र कुमार गुप्ता, महावीर शर्मा और प्रदीप कुमार श्रीवास्तव हैं.

अब केस नंबर 1 के वादी हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. केस नंबर एक नेक्स्ट फ्रेंड के जरिए देवता के नाम पर दायर किया गया. इसके दूसरे वादी रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, करुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह और त्रिपुरापुरी तिवारी हैं. इन याचिकाकर्ताओं के वकील सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कोर्ट में कहा कि मुकदमा दाखिल करने वाले वह पहले पक्ष हैं और दूसरे मुकदमे सिर्फ कॉपीकैट हैं.

श्याम दीवान ने कोर्ट में कहा, 'ओरिजनल सूट नंबर 1/2023 को लीडिंग केस बनाया गया. अगर हम प्लेनटिफ की तरफ से कोई प्रतिनिधि सूट करते हैं तो उसे लीडिंग सूट होना चाहिए क्योंकि इसी सूट ने सब कुछ किया. बाकी सब कॉपीकैट हैं और थीम के हिसाब से उन्होंने मुद्दों को बड़े पैमाने पर लिया इसलिए यह बहुत गंभीर हिस्सा है... अगर ऐसा करना है तो एक सही प्रक्रिया होनी चाहिए. आप कुछ कॉपीकैट मुकदमे नहीं कर सकते हैं, जो अचानक से इस तरह सामने आए.'

वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि सूट नंबर 17 की एप्लीकेशन में सिर्फ डिफेंडेंट्स को मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर मानने की इजाजत मांगी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट कुछ ज्यादा ही आगे निकल गया और उसने सूट नंबर 17 में प्लेनटिफ्स को भगवान कृष्ण के भक्तों की तरफ से भी प्रतिनिधि प्लेनटिफ के तौर पर काम करने की इजाजत दे दी.

यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है, जिसके बारे में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त कर इसका निर्माण कराया था. मथुरा की एक अदालत में दायर 20 से ज्यादा दीवानी मुकदमे हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिए गए हैं और उनके निर्णय लंबित हैं.

सुप्रीम कोर्ट पहले से ही मस्जिद समिति की ओर से दायर एक याचिका पर विचार कर रहा है, जिसमें हाईकोर्ट के 26 मई, 2023 के आदेश को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने मथुरा की अदालत में लंबित विवाद से संबंधित सभी मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था. हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि वह मूल सुनवाई उसी तरह करे जैसे उसने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद में की थी.

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