पीलीभीत। गोरखपुर-शामली पानीपत एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित मार्ग से पीलीभीत को हटाए जाने के फैसले पर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई थी इसको लेकर एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद को 20अगस्त को पत्र लिखकर इस एक्सप्रेसवे में पीलीभीत को दोबारा शामिल करने का आग्रह किया है।
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-शामली पानीपत एक्सप्रेसवे, लगभग 700 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इसके पुराने प्रस्ताव में यह मार्ग गोरखपुर से शुरू होकर महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर, मेरठ होते हुए शामली में समाप्त होने वाला था।
हालांकि, हाल ही में इस प्रस्ताव में संशोधन किया गया है। नए मार्ग के अनुसार, अब यह एक्सप्रेसवे सीतापुर, शाहजहांपुर पुवायां, पीलीभीत के बीसलपुर, बदायूं, रामपुर और मुरादाबाद से होते हुए शामली तक जाएगा, जिससे पीलीभीत इस महत्वपूर्ण परियोजना से बाहर हो गया है।सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप एडवोकेट ने अपने पत्र में बताया कि पीलीभीत एक विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व वाला जिला है। उचित सड़क मार्ग न होने के कारण यहां पर्यटक आने से कतराते हैं, जिससे पर्यटन और जिले के विकास में बाधा आ रही है। उन्होंने कहा कि पहले से प्रस्तावित मार्ग से पीलीभीत को हटाना कहीं न कहीं जिले के विकास को बाधित करेगा।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि वे इस मामले पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से बात करें और गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे को पुरानी योजना के अनुसार पीलीभीत से होकर गुजारने की व्यवस्था करें। कश्यप ने कहा कि ऐसा करना पीलीभीत की जनता पर एक बड़ी कृपा होगी और जिले के विकास को गति मिलेगी। इसी क्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सीमांकन के अंतिम चरण में पीलीभीत को सम्मिलित करने का आदेश जारी किया है।
शिवम कश्यप ने पुनः एक्सप्रेसवे में पीलीभीत को सम्मिलित किए जाने पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार का आभार व्यक्त किया। यह एक्सप्रेसवे आर्थिक और सामाजिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।
