हैदरगढ़/बाराबंकी। आरोपी लेखपाल को ही जांच अधिकारी बनाने का मामला सामने आया है यही कारण है कि तहसील हैदरगढ़ प्रशासन पर पक्षपात और लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे है। पंचायत शेषपुर निवासी आशीष तिवारी ने आरोप लगाया कि उनकी सहन की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में क्षेत्रीय लेखपाल ने न्यायालय के स्टे आदेश की अवहेलना करते हुए विपक्षी पक्ष के पक्ष में झूठी रिपोर्ट लगा दी।आशीष तिवारी और राकेश कुमार मिश्रा के बीच भूमि विवाद को लेकर बाराबंकी सिविल न्यायालय पहले ही तिवारी के पक्ष में फैसला दे चुका है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष मानने को तैयार नहीं था। मामले में तिवारी ने पुनः अदालत से स्टे ऑर्डर लिया।
तीन अगस्त को भारी बारिश के दौरान शिव बबूला का पेड़ आशीष तिवारी के रास्ते में गिर गया, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया। जब इसकी शिकायत संबंधित विभाग में की गई तो आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल रामनरेश ने बिना मौके का निरीक्षण किए, विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर न्यायालय के स्टे आदेश की अनदेखी करते हुए गलत आख्या प्रस्तुत कर दी।
आरोपी लेखपाल के खिलाफ शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी सहित उच्चाधिकारियों को भेजी गई। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय लेखपाल रामनरेश को ही उसी मामले का जांच अधिकारी बना दिया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि तहसील प्रशासन की यह कार्यशैली ‘अंधेर नगरी चैपट राजा’ जैसी व्यवस्था को दर्शाती है। पीड़ित ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी लेखपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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