पाकिस्तान बॉर्डर के पास भारतीय सेना की बड़ी बैठक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सातों कमांड के आर्मी कमांडर्स रहेंगे मौजूद
October 24, 2025
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय थलसेना की यह पहली आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस कल जैसलमेर में आयोजित की जा रही है। यह कॉन्फ्रेंस रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका आयोजन Jaisalmer में किया जा रहा हैं जो की अंतरराष्ट्रीय सीमा (India-Pakistan Border) के बेहद करीब है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिस्सा लेंगे और सेना के आर्मी कमांडर्स को संबोधित करेंगे। इस दौरान आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी सातों कमांड्स के आर्मी कमांडर्स मौजूद रहेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद की तैयारियों पर फोकस,इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य एजेंडा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस, आधुनिकीकरण, और भविष्य की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। इसमें दो मोर्चों (Two-Front War) पर एक साथ कार्रवाई की क्षमता, नई बटालियनों जैसे भैरो और अश्नी बटालियन, तथा ड्रोन, मिसाइल और इन्फैंट्री मॉडर्नाइजेशन पर भी चर्चा होगी।
जैसलमेर में इस बार का आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सेना अपनी ग्राउंड ऑपरेशनल तैयारी और बॉर्डर सुरक्षा तंत्र को लेकर कितनी सतर्क और तत्पर है। सीमा के नजदीक यह कॉन्फ्रेंस सेना के स्थलीय (ground) अनुभव और सामरिक योजनाओं को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का अवसर भी देगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने संबोधन में सेना की अब तक की उपलब्धियों की सराहना करेंगे और भविष्य के लक्ष्यों की दिशा तय करने पर बल देंगे। उम्मीद है कि वे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण, आधुनिकीकरण और तकनीकी नवाचार पर भी प्रकाश डालेंगे।
जैसलमेर की यह आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच और भविष्य की सैन्य दिशा को तय करने वाला मंच साबित होगी। यह सम्मेलन स्पष्ट संदेश देता है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में तैयार है, चाहे वह सीमाओं की रक्षा हो या देश की गरिमा की सुरक्षा।
