लखनऊ। पलिया कला लखीमपुर खीरी दुधवा नेशनल पार्क के घने जंगलों से सटे गांवों में बीते करीब दो हफ्ते से बाघ का आतंक छाया हुआ है.फरसैया ग्राम सभा, बसंतापुर, जमुनिया फॉर्म, सिमरीपूरवा के ग्रामीण इन दिनों भय के साए में है.जंगल से निकलकर बाघ लगातार ग्रामीण इलाकों मेंघूम रहा है और अब तक कई बकरियो,गायों, सांडों को अपना शिकारध् निवाला बना चुका है.ग्राम फरसैया की गलियों में अब सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है. ग्रामीण रात रात भर जागकर खेतों और बाडो के पास पहरा देते हैं. आज रात में ही ग्राम सभा फरसैया निवासी मैकूलाल की गाय को बाघ ने अपना निवाला बना लिया. स्थानीय किसान ध् ग्रामीण चैधरी बंकड सिंह कहते हैं हम लोग यहां पर वर्षों से रह रहे हैं लेकिन इस बार बाघ का आतंक गांव और घरों तक पहुंच गया है इन ग्रामीणों को पग पग पर दहशत ध् खतरा नजर आता है खेतों पर कृषि कार्य करना दुभर हो रहा है. ग्राम सभा बसंतापुर के दीपक सिंह कहते हैं रात में जब बाग दहाड़ता है तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर जाता है. हम लोग रात भर जागकर पहरा देते.ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की टीम केवल दिखावे के लिए आती है और अब तक जो पिंजरा भी लगाया गया था उससे कोई फायदा नहीं हुआ वन विभाग को गांव की चैकसी बढ़ाने की आवश्यकता है।
जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होगी तब तक वन विभाग नहीं जागेगा यह कहना है यहां के निवासियों का ग्रामीणों की मांग है रात के समय वन सुरक्षा ग्रस्त बढ़ाई जाए, पिंजरे और ट्रैप कैमरे तत्काल लगाया जाए, एवं मवेशियों की मौत का मुआवजा तत्काल राहत के तौर पर पीड़ित व्यक्ति को दिया जाए, ग्रामीणों को जागरूकता और सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाय.
गांव में बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं पुरुष महिला किसान खेतों तक नहीं जा पा रहे हैं दिन में भी ग्रामीणों की नजर जंगल की ओर रहती है कहीं बाघ फिर से ना आ जाए।
स्थानीय निवासियों की मांग है. प्रशासन और दुधवा नेशनल पार्क से कि वह तत्काल संज्ञान ले ताकि किसी भी जनहानि से पहले ही कार्यवाही की जा सके यूं तो दुधवा नेशनल पार्क के इलाकों में जंगली जानवरों की गांव की ओर आने की घटनाएं नई-नहीं है पहले भी सामने आती रही है परंतु इस बार लगातार पिछले करीब 2 हफ्ते से बाघ का इन क्षेत्रों में सक्रिय रहना ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
