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सरस्वती विसर्जन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व


शारदीय नवरात्रि के दौरान चार दिवसीय सरस्वती पूजन भी किया जाता है। मुख्य रूप से यह पूजा दक्षिण भारतीय राज्यों केरल और तमिलनाडु में की जाती है। हालांकि अब कई उत्तर भारतीय लोग भी सरस्वती पूजन करने लगे हैं। सरस्वती पूजा का शुभारंभ कई जगहों पर नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर होता है तो कई स्थानों पर अष्टमी तिथि के दिन। वहीं नवरात्रि की नवमीं तिथि या विजयदशमी पर सरस्वती विसर्जन किया जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि साल 2025 में सरस्वती विसर्जन कब है और विसर्जन का शुभ मुहूर्त कब रहेगा।

सरस्वती विसर्जन से पूर्व आपको माता रानी की विधिवत पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन माता सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर आपको पूजा स्थल पर स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद विधिपूर्वक माता की पूजा आरंभ करनी चाहिए। पूजा के दौरान धूप, दीप जलाने के बाद माता को फल, पुष्प, मिष्ठान आदि आपको अर्पित करना चाहिए। माता सरस्वती को साबूदान की खीर का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान माता की आरती और मंत्रों का जप भी अवश्य करना चाहिए। इस दिन आप माता के मंत्र 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' का 108 बार जप करते हैं तो बुद्धि और ज्ञान की आपको प्राप्ति होती है। इसके बाद आपको शुभ मुहूर्त में सरस्वती माता की मूर्ति का विसर्जन करना चाहिए। इस दिन सरस्वती पूजा के साथ ही आपको वाद्ययंत्रों की पूजा भी करनी चाहिए। इसके साथ ही बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी सामग्री भी इस दिन दान देना शुभ माना जाता है।

सरस्वती माता का विधिवत पूजन करने और विजयदशमी के दिन विसर्जन करने से ज्ञान की देवी माता सरस्वती का आशीर्वाद भक्तों पर बरसता है। माता की पूजा करने से ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है साथ ही कला के क्षेत्रों में भी आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जो लोग शिक्षा, गायन, वादन आदि के क्षेत्र से जुड़े हैं उन्हें बेहद अनुकूल परिणाम माता की पूजा से प्राप्त होते हैं।

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